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जबलपुर: सिख विरोधी दंगों की पीड़ित को हाईकोर्ट से राहत, 7.23 लाख का नोटिस रद्द; प्रशासन पर 50 हजार का जुर्माना

Sun, 13 Sep 2026 01:08 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 13 Sep 2026 01:08 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़ित सीहोर निवासी गुरचरण कौर रात्रा को राहत देते हुए जिला प्रशासन का रिकवरी नोटिस निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि संकट के समय दी गई सरकारी राहत मानवीय सहायता होती है, जिसकी बाद में वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने प्रशासन पर 50 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगाई है।
 

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1984 Anti-Sikh Riots Case High Court Quashes 7.23 Lakh Notice to Victim Imposes 50 thousand Fine Local Admin
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़ित बुजुर्ग महिला को बड़ी राहत दी है। महिला ने सीहोर जिला प्रशासन द्वारा मुआवजा राशि वापस लेने के लिए जारी किए गए रिकवरी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव कालगांवकर की एकलपीठ ने वृद्ध महिला के पक्ष में राहतकारी आदेश जारी करते हुए रिकवरी नोटिस को निरस्त कर दिया। एकलपीठ ने सीहोर जिला प्रशासन पर 50 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए उक्त राशि मुआवजे के रूप में प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।
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1984 के दंगों में संपत्ति को हुआ था नुकसान
सीहोर निवासी गुरचरण कौर रात्रा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनके पति की मौत हो गई है। साल 1984 के दंगों में उनकी संपत्ति को नुकसान हुआ था। संपत्ति को हुए नुकसान के मुआवजे के लिए उन्होंने 9 मई 2013 को आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने पहले मिले पांच हजार रुपये और नानावटी आयोग की सिफारिश पर मिले 45 हजार रुपये की जानकारी भी दी थी। जांच के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने मुआवजा राशि के रूप में 7.23 लाख रुपये स्वीकृत करते हुए भुगतान कर दिया। प्रशासन ने शिकायत के आधार पर मुआवजा राशि की रिकवरी का नोटिस जारी किया था।
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रिकॉर्ड की समुचित जांच किए बिना कार्रवाई
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कलेक्टर और अपर कलेक्टर ने रिकॉर्ड की समुचित जांच किए बिना कार्रवाई की। एकलपीठ ने राहत राशि वापस लेने के आदेश और रिकवरी नोटिस को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि संकट के समय सरकार द्वारा दी गई राहत कानूनी मुआवजा नहीं, बल्कि मानवीय सहायता होती है। इसे बाद में वापस नहीं वसूला जा सकता। एकलपीठ ने वृद्ध महिला को परेशान करने के एवज में जिला प्रशासन पर 50 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए उसे याचिकाकर्ता को हर्जाने के रूप में प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।
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