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MP High Court: साइबर अपराध कर राशि भेजते थे पाकिस्तान और श्रीलंका, करोड़ों का क्राइम करने वाले को जमानत नहीं
Wed, 01 Jan 2025 09:30 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2025 09:30 PM IST
सार
मामला तमिलनाडु के सीताकड़ी निवासी बाबूलाल उर्फ बबलू की ओर से दायर किया गया था, जिसे भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने शिवम शर्मा की शिकायत पर 30 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये का साइबर अपराध करने वाले आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया है। जस्टिस पीके अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष शासन की ओर से दलील दी गई कि भोले-भाले लोगों का अपना शिकार बनाकर साइबर ठगी कर करोड़ों रुपये की राशि वसूल कर उसे पाकिस्तान और श्रीलंका भेजा जाता है। जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का गंभीर अपराध है। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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दरअसल, यह मामला तमिलनाडु के सीताकड़ी निवासी बाबूलाल उर्फ बबलू की ओर से दायर किया गया था, जिसे भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने शिवम शर्मा की शिकायत पर 30 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था। मामले में आरोप था कि वैभव ने तीन लाख रुपये का लोन दिलाने के नाम पर उससे ब्लैंक चेक, एटीएम कार्ड लिया। इसके बाद खाते में भारी भरकम ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिलने पर शिवम ने क्राइम ब्रांच को 10 जुलाई 2024 को शिकायत दी।
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जांच में पता चला कि वैभव अपने एक साथी के साथ मिलकर भोपाल, सीहोर और आष्टा में रहने वाले भोले-भाले लोगों के बैंक अकाउंट किराए पर लेता है। ऑनलाइन ठगी से मिलने वाली रकम किराए पर लिए गए बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। उसके बाद वैभव और उसका एक दोस्त रकम निकालकर आवेदक बाबूलाल को भेजते थे। बाबूलाल उस रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर पाकिस्तान के गनी बाबा को भेजा था। इसका उन सभी को कमीशन मिलता था।
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जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े इस मामले में बाबूलाल को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया। वहां पर उसके और उसकी पत्नी के मोबाइल से पाकिस्तान के गनी बाबा और श्रीलंका के लोगों से बातचीत के सबूत भी मिले। बाबूलाल और उसकी पत्नी के मोबाइल से वैभव और उसके दोस्त के द्वारा जुटाए गए कई बैंक अकाउंट की जानकारी भी गनी बाबा को व्हाट्सएप से भेजी गई थी।
