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Jabalpur News: गलत शपथ पत्र पेश किया, हाईकोर्ट ने लोक शिक्षण आयुक्त पर लगाया एक लाख का जुर्माना
Sat, 10 Aug 2024 09:08 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2024 09:08 AM IST
सार
हाईकोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में याचिकाकर्ता कंपनी को उसकी बकाया राशि 9 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने के निर्दश। साथ ही जुर्माने के एक लाख रुपये भी याचिकाकर्ता को देने का फैसला सुनाया।
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high court
विस्तार
मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट बेंच ने गलत शपथ पत्र पेश करने पर लोक शिक्षण आयुक्त पर एक लाख रुपए की कॉस्ट (जुर्माना) लगाई। जस्टिस राजमोहन सिंह और जस्टिस देवनारायण मिश्रा की खंडपीठ ने विभाग को निर्देशित किया कि याचिकाकर्ता कंपनी को उसका बकाया राशि का 9 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करे। साथ ही जुर्माने की राशि भी याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए गए हैं, यह प्रक्रिया एक महीने में पूरी करनी होगी।
भोपाल के कल्पना कंस्ट्रक्शन प्रोपराइटर पंकज गुप्ता की ओर से अधिवक्ता एनएस रूपराह ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को तीन कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी और बाद में तीनों का वर्क ऑर्डर मिला। तीनों कार्य पूर्ण हुए तो तीन कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी मिले। दो कार्यों का भुगतान हो गया, लेकिन तीसरे कार्य का दो तिहाई भुगतान रोक दिया गया। इसका कारण फंड की कमी बताया गया।
मामले पर सुनवाई के दौरान लोक शिक्षण आयुक्त ने अदालत को गुमराह करने के उद्देश्य से यह शपथ पत्र दिया कि चौथा कार्य अपूर्ण था, इसीलिए तीसरे कार्य का दो तिहाई भुगतान नहीं किया गया। न्यायालय ने इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए कॉस्ट अधिरोपित कर दी और शेष राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
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भोपाल के कल्पना कंस्ट्रक्शन प्रोपराइटर पंकज गुप्ता की ओर से अधिवक्ता एनएस रूपराह ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को तीन कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी और बाद में तीनों का वर्क ऑर्डर मिला। तीनों कार्य पूर्ण हुए तो तीन कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी मिले। दो कार्यों का भुगतान हो गया, लेकिन तीसरे कार्य का दो तिहाई भुगतान रोक दिया गया। इसका कारण फंड की कमी बताया गया।
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मामले पर सुनवाई के दौरान लोक शिक्षण आयुक्त ने अदालत को गुमराह करने के उद्देश्य से यह शपथ पत्र दिया कि चौथा कार्य अपूर्ण था, इसीलिए तीसरे कार्य का दो तिहाई भुगतान नहीं किया गया। न्यायालय ने इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए कॉस्ट अधिरोपित कर दी और शेष राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
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