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Jabalpur News: आंगनवाड़ी सुपरवाइजर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती, हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव से मांगा जवाब
Fri, 07 Feb 2025 10:26 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 10:26 PM IST
सार
हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आंगनवाड़ी सुपरवाइजर भर्ती में सहायिकाओं को अयोग्य ठहराने को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता ने इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया। जस्टिस विवेक अग्रवाल व अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी।
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मप्र हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आंगनवाड़ी सुपरवाइजर के पद पर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सामान्य योग्यता के बावजूद भी आंगनवाड़ी सहायिकाओं को आवेदन के लिए अयोग्य माना जाना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव विभाग के डायरेक्टर, ज्वाइंट डायरेक्टर और कर्मचारी चयन आयोग के संचालक को नोटिस जारी किए हैं।
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याचिकाकर्ता रीवा निवासी मिथिलेश सुमन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत हैं। आंगनवाड़ी सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा 2024 के जारी विज्ञापन के अनुसार उक्त पद के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आवेदन कर सकती है। आंगनवाडी सहायिका उक्त पद के लिए आवेदन नहीं कर सकती है।
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याचिका में कहा गया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के लिए शैक्षणिक योग्यता सहित अन्य अहर्ताएं एक समान निर्धारित हैं। इसके बावजूद उक्त पद के लिए आंगनवाड़ी सहायिकाओं को अयोग्य माना गया है। एक सामान्य शैक्षणित योग्यता व अर्हताएं होने के बावजूद भी आंगनवाड़ी सहायिकाओं को अयोग्य करार दिया जाना समानता के अधिकार का उल्लंघन व भेदभाव पूर्ण निर्णय है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 14 फरवरी को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता राजेश चंद्र तथा हैरी बमोरिया ने पैरवी की।
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