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55 फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का मामला: CBI ने 304 संस्थानों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की; अगली सुनवाई 23 को

Wed, 17 Jan 2024 03:43 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 17 Jan 2024 03:43 PM IST
सार

Jabalpur Hindi News: मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता देने के मामले में सीबीआई ने हाईकोर्ट में बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी को करेगा।
 

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CBI presented sealed investigation report of nursing colleges in MP High Court; Next hearing on 23 January
जबलपुर हाई कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष बुधवार को सीबीआई ने बंद लिफाफे में 50 नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश की। सीबीआई अभी तक मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले 304 नर्सिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने 50 कॉलेजों की जांच पर स्थगन आदेश दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए अलगी सुनवाई 23 जनवरी को निर्धारित की है।

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याचिका में लगा फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित करने का आरोप
याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में फर्जी तरीके से नर्सिंग कॉलेज संचालित होने को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई, वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
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कई नर्सिंग कॉलेजों का एक ही व्यक्ति है प्राचार्य
याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि एक ही व्यक्ति कई नर्सिंग कॉलेजों का प्राचार्य है और तथ्यात्मक रूप से भी अलग-अलग कॉलेज में कार्यरत है, जिन कॉलेज में कार्यरत है उनकी दूरी सैकड़ों किलोमीटर दूर है। इसके अलावा माईग्रेट तथा फर्जी तत्थों का मामला भी याचिकाकर्ता की तरफ से उठाया गया था। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए डीएमई को तलब किया था। डीएमई अरुण श्रीवास्तव ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मांफी मांगते हुए पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ उचित कार्रवाई के संबंध में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया था। युगलपीठ ने ग्वालियर तथा इंदौर खंडपीठ में लंबित नर्सिंग कॉलेज संबंधित याचिकाओं को मुख्यपीठ स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे। 
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कुल 304 कॉलेजों की जांच रिपोर्ट हो चुकी पेश
याचिकाओं की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंपी थी। युगलपीठ ने सीबीआई को जांच के लिए तीन माह का समय दिया था। याचिका की सुनवाई के दौरान चार जनवरी को सीबीआई ने 254 नर्सिंग कॉलेजों की जांच रिपोर्ट युगलपीठ के समक्ष पेश की थी। बचे हुए कॉलेजों की जांच के लिए युगलपीठ ने 15 दिनों का समय दिया था।


याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ से 50 कॉलेजों की रिपोर्ट पेश की गई। सीबीआई द्वारा एमपीएमएसयू से मान्यता प्राप्त 304 कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट अभी तक पेश की गई है। सरकार की तरफ से जीएनएम के रिजल्ट घोषित करने की अनुमति युगलपीठ से मांगी गई। युगलपीठ ने इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान खुद याचिकाकर्ता भी मौजूद रहे।

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