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Jabalpur News: कोर्ट सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र व राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी

Mon, 04 Nov 2024 10:06 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Mon, 04 Nov 2024 10:06 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में न्यायालयीन सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को एडिट कर सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने इस संबंध में केंद्र व राज्य शासन, सूचना प्रसारण मंत्रालय, और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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Jabalpur News: Ban on editing live streaming of court hearing and uploading it on social media
high court

विस्तार

मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को एडिट करके इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर अपलोड किए जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य शासन सूचना प्रसारण मंत्रालय, मेटा प्लेटफार्म, यू.ट्यूब, एक्स और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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दमोह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. विजय बजाज की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायालयीन प्रक्रिया की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए कुछ नियम बनाए गए थे। इन नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि लाइव स्ट्रीमिंग के सभी कॉपीराइट हाईकोर्ट के पास हैं। इन नियमों के अंतर्गत किसी भी प्लेटफार्म पर लाइव स्ट्रीमिंग का मनमाना उपयोग, शेयर, ट्रांसलेट या अपलोड करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए कई इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिपिंग को एडिट करके अपलोड करके आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेशों के मीम्स, शार्ट बनाए जाते हैं और न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं व शासकीय अधिकारियों पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं।
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याचिका में राहत चाही गई थी कि हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग का दुरुपयोग कर इंटरनेट मीडिया जो धनार्जन किया है, उसकी वसूली की जाए। इसके अलावा सोशल मीडिया में अपलोड की गई क्लिपिंग को डिलीट किया जाये। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद उक्त आदेष जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ  अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल तथा अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने पैरवी है। 
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