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MP News: दुष्कर्म पीड़ित 16 वर्षीय किशोरी को गर्भपात की अनुमति, कोर्ट ने इस बात का ख्याल रखने के दिए निर्देश

Thu, 28 May 2026 11:08 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 28 May 2026 11:08 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़ित 16 वर्षीय किशोरी को 26 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया कि यदि बच्चा जीवित जन्म लेता है और परिवार उसे नहीं रखना चाहता, तो 15 दिन बाद उसे राज्य अथवा सीडब्ल्यूसी को सौंपा जा सकेगा।

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16-year-old victim granted abortion, High Court gave its decision
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़ित 16 वर्षीय किशोरी को गर्भपात की अनुमति प्रदान की है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित 26 सप्ताह की गर्भवती है। जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पीड़ित और उसके माता-पिता बच्चे के जिंदा पैदा होने पर उसे साथ रखने के लिए तैयार नहीं हैं, तो उसे जन्म की तारीख से 15 दिन बाद राज्य अधिकारियों या सीडब्ल्यूसी को सौंप सकते हैं।

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सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि पीड़ित के पिता ने एडिशनल सेशंस जज शहडोल के सामने प्रेग्नेंसी खत्म करने के लिए आवेदन किया है। पीड़िता रेप पीड़ित है और पिता प्रेग्नेंसी खत्म करना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए पीड़ित की मेडिकल जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे। सरकार की तरफ से पेश की गई मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़ित 26 हफ्ते की गर्भवती है और उसे खत्म किया जा सकता है। यह रिपोर्ट सात डॉक्टरों की एक टीम द्वारा जांच और डायग्नोसिस के बाद दी गई है, जिसमें दो गाइनेकोलॉजिस्ट हैं। परिवार व पीड़िता को गर्भपात के दौरान होने वाले खतरे के संबंध में जानकारी दी गई है। परिवार तथा पीड़ित गर्भ खत्म करने के लिए सहमति दी है। मेडिकल ऑफिसर ने ब्लड, सोनोग्राफी और डायग्नोसिस रिपोर्ट और दूसरी संबंधित जांच की है। राज्य के की तरफ से अनुमति मांगी गई कि हॉस्पिटल को दुष्कर्म पीड़ित का गर्भ खत्म करने का निर्देश दिया जाए।
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एकलपीठ ने पीड़िता की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाजत देते हुए अपने आदेश में कहा है कि पीड़िता अपने माता-पिता के साथ जल्द से जल्द मेडिकल बोर्ड द्वारा तय समय पर अस्पताल में उपस्थित रहें। डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम प्रेग्नेंसी को खत्म करने के बारे में फैसला लेते हुए जल्द से जल्द उसे समाप्त करें। पूरी कार्यवाही डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम की मौजूदगी में किया जाएगा। प्रेग्नेंसी खत्म करते समय डॉक्टर पूरी सावधानी बरतेंगे और पीड़ित को सभी मेडिकल सुविधा प्रदान की जाए। बच्चा ज़िंदा पैदा होता है, तो उसकी देखभाल करना राज्य सरकार की ड्यूटी होगी। डॉक्टर यह सुनिश्चित करें की भ्रूण या बच्चे का एक सैंपल जांच के लिए सुरक्षित रखा जाए और आरोपी पर आगे की जांच और मुकदमा चलाने के लिए तुरंत जांच अधिकारी को सौंप दिया जाए।

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह भी साफ किया जाता है कि अगर पीड़ित और उसके माता-पिता जिंदा पैदा हुए बच्चे को रखने के लिए तैयार नहीं हैं, तो वे बच्चे को उसके जन्म की तारीख से 15 दिन बाद राज्य अधिकारियों या सीडब्ल्यूसी को सौंप सकते हैं। बच्चा जिंदा पैदा होता है तो वह 15 दिन तक मां के पास रहेगा। जुवेनाइल केयर एंड प्रोटेक्शन एक्ट और राज्य या केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में बनाए गए नियमों और दूसरी गाइडलाइंस के अनुसार बच्चे को किसी भी इच्छुक परिवार को गोद देने के लिए आज़ाद होगी।

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