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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: Why the benefit of EWS reservation only for the general category?, High Court issued notice to the government and sought answer

जबलपुर: EWS आरक्षण का लाभ सिर्फ सामान्य वर्ग को क्यों?, हाईकोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Tue, 22 Mar 2022 08:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 22 Mar 2022 08:10 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ सिर्फ सामान्य वर्ग को दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि ओबीसी, एसटी-एससी वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को इससे बंचित किया जाना असंवैधानिक है। जस्टिस सुजय पाल व जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
 

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Jabalpur: Why the benefit of EWS reservation only for the general category?, High Court issued notice to the government and sought answer
court demo - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि ओबीसी, एसटी-एससी वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लाभ से बंचित किया जाना असंवैधानिक है। कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस की तरफ से दायर याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण अधिसूचना 2 जुलाई 2019 की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि उक्त पालिसी में ओबीसी, एससी, एसटी को लाभ से वंचित किया गया है। संविधान में ईडब्ल्यूएस का लाभ समाज के सभी वर्गों को दिए जाने का प्रावधान 103वें संविधान संशोधन में किया गया है। अनुच्छेद 15(6) एवं 16(6) में उक्त व्यवस्था की गई है, परंतु मध्य प्रदेश शासन ने उक्त पॉलिसी में ओबीसी, एससी, एसटी को क्लॉज 2 के अनुसार वंचित कर दिया है। ईडब्ल्यूएस के फार्मेट में भी उल्लेखित किया गया है कि जो ओबीसी, एससी-एसटी में नहीं आते हैं केवल उन्हीं को ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांग है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह ने पैरवी की।
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