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जबलपुर: परीक्षा से एक घंटे पहले HC पहुंची छात्रों की याचिका, एग्जाम में बैठने की दी अनुमति, विवि को नोटिस जारी

Fri, 18 Sep 2026 08:14 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 18 Sep 2026 08:14 AM IST
सार

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के MSW छात्रों को फीस विवाद के चलते परीक्षा में बैठने से रोका गया था। परीक्षा शुरू होने से महज एक घंटे पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ ने छात्रों द्वारा दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई कर परीक्षा में शामिल होने के निर्देश दिए।

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Jabalpur: Students Approach High Court an Hour Before Exam, Court Allows Them to Appear in Test
मप्र हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट में परीक्षा प्रारंभ होने से सिर्फ एक घंटा पहले छात्रों की तरफ से दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन पेश किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के आदेश जारी किए।

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याचिकाकर्ता छात्र शिवांकी तिवारी, राहुल दुबे, रितेश कुमार पांडे और तौफीक की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वे रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से संबंधित यूटी़डी विभाग में एमएसडब्ल्यू का कोर्स कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार की ओर से फीस का भुगतान नहीं किए जाने के कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।
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याचिकाकर्ताओं को मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत एडमिशन मिला था। इसके तहत पात्र पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को केवल मेस का खर्च और कॉशन मनी देनी होती है। एडमिशन, एनरोलमेंट और परीक्षा फीस का भुगतान राज्य सरकार को करना था। याचिकाकर्ता शिवांकी तिवारी और राहुल दुबे दूसरे सेमेस्टर, जबकि रितेश कुमार पांडे और तौफीक चौथे व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा देने वाले थे।
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विश्वविद्यालय ने परीक्षा में शामिल करने से किया इनकार
विश्वविद्यालय का तर्क है कि दाखिला देने वाला संस्थान स्वायत्तशासी है। छात्रों की ओर से अभ्यावेदन दिए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दूसरे सेमेस्टर के छात्रों को दो विषय और चौथे सेमेस्टर के छात्रों को एक विषय की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी। दूसरे सेमेस्टर की दूसरी परीक्षा और चौथे सेमेस्टर की पहली परीक्षा बुधवार को संपन्न होने के बाद गुरुवार को आयोजित परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से विश्वविद्यालय ने इनकार कर दिया।

इसके बाद याचिकाकर्ता छात्रों की तरफ से अधिवक्ता देवेंद्र कुमार कुशवाहा तथा अंजलि तिवारी ने गुरुवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन पेश किया। अधिवक्ताओं की तरफ से बताया गया कि याचिकाकर्ता छात्रों की परीक्षा दोपहर 12 बजे से निर्धारित है।

परीक्षा से एक घंटे पहले कोर्ट ने दिए निर्देश
एकलपीठ ने पूर्वाह्न 11 बजे अनावेदक विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को बुलाकर छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश जारी किए। इसके बाद याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा फीस के भुगतान के संबंध में अनावेदक विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के बीच आपसी विवाद है। इसका भुगतान आम तौर पर छात्रों को नहीं करना था।


एकलपीठ ने याचिकाकर्ता छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश जारी करते हुए अनावेदक विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि मामले में अंतिम निर्णय याचिका के अधीन रहेगा।

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