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जबलपुर: मेडिकल छात्र को हाईकोर्ट से राहत, समय सीमा में नहीं दी नियुक्ति इसलिए बांड की शर्त हुई रद्द

Fri, 22 Apr 2022 07:17 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Fri, 22 Apr 2022 07:17 PM IST
सार

मेडिकल स्टूडेंट ने एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के बांड की शर्त के मामले में कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें बताया गया था कि समय सीमा में नियुक्ति नहीं देने से बांड की शर्त खत्म हो जाती है। हाईकोर्ट ने स्टूडेंट को राहत प्रदान की है। 

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Jabalpur: Relief from High Court to medical student, appointment not given in time limit, so bond condition canceled
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिकल छात्र को हाईकोर्ट से राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस डीडी बंसल की युगलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि पीजी छात्र को कोर्स पूरा करने के बाद निर्धारित समय अवधि में नियुक्ति नहीं दी गई। इसलिए एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के बांड की शर्त स्वत: समाप्त हो जाती है। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता छात्र को दस्तावेज तथा एनओसी प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।
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याचिकाकर्ता राहुत मित्तल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि पीजी मेडिकल कोर्स मार्च 2017 में उत्तीर्ण किया था। मध्य प्रदेश चिकित्सा और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रवेश नियम की धारा 11 के तहत पीसी कोर्स करने के बाद मेडिकल ऑफिसर के तौर पर एक साल ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करना आवश्यक है। इसके लिए पीजी कोर्स करने वाले छात्रों से बांड भरवाया जाता है। कोर्स पूरा करने के बाद तीन माह की निर्धारित समय सीमा में नियुक्ति प्रदान करने का प्रावधान है।
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याचिका में राहत चाही गई थी कि निर्धारित समय अवधि में नियुक्ति नहीं करने के बाद बांड की शर्तें उसके लिए बंधककारी नहीं हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि बांड भरवाये जाने के खिलाफ याचिकाकर्ता छात्र ने एक अन्य याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। जिसके कारण याचिकाकर्ता छात्र को नियुक्ति प्रदान नहीं की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि उक्त याचिका का मुद्दा अलग था। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता छात्र को राहत प्रदान करते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की। 
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