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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur: Police has to bear the expenses in search of minor daughter, court gives time to government advocate to gather information

Jabalpur: नाबालिग बेटी की तलाश में उठाना पड़ रहा पुलिस का खर्च, जानकारी जुटाने के लिए कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को दिया समय

Mon, 30 May 2022 08:32 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 30 May 2022 08:32 PM IST
सार

हाईकोर्ट में दायर याचिका में एक पिता ने बताया है कि उसकी लापता बेटी की तलाश में पुलिस उसे लेकर हैदराबाद गई थी। इस दौरान होटल में रुकना, खाना-पानी, डीजल आदि का खर्च भी उसे उठाना पड़ा। इसके बिल भी याचिका के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही बताया कि पुलिस सही कार्रवाई भी नहीं कर रही है। 

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Jabalpur: Police has to bear the expenses in search of minor daughter, court gives time to government advocate to gather information
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुस्लिम युवक द्वारा नाबालिग बेटी को भगाकर ले जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोपी लगाया गया था कि बेटी की तलाश में पुलिस टीम का खर्चा भी उसे उठाना पड़ रहा है। हाईकोर्ट जस्टिस एसएस भट्टी तथा जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने शासकीय अधिवक्ता को इस संबंध में दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित की है।
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बता दें कि जबलपुर निवासी नरेश कुमार कुशवाह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनकी 16 साल की बेटी जरूरी काम से 11 मई की सुबह लगभग 11 बजे घर से निकली थी। जिसके बाद से वह लापता है और उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। उसी दिन से क्षेत्र में रहने वाला सरफराज नामक युवक भी गायब है। पतासाजी के बाद उसने 11 मई की रात को बरगी थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने जानकारी के देने बावजूद भी सरफराज की बजाए अज्ञात व्यक्ति के नाम पर एफआईआर दर्ज की।
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याचिका में कहा गया था कि बेटी की तलाश में पुलिस उसे लेकर हैदराबाद गई थी। इस दौरान होटल में रुकना, खाना-पानी, डीजल आदि का खर्च भी उसे उठाना पड़ा। इसके बिल भी याचिका के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। याचिका में कहा गया था कि परिवारिक विवाद के कारण उसकी पत्नी अलग रहती है। पत्नी के पास बेटी का फोन आया था, जिसकी जानकारी पत्नी ने उसे स्वंय दी थी। सभी जानकारी उपलब्ध करवाने के बावजूद भी पुलिस ने उसकी पत्नी तथा सरफराज के परिजनों से किसी प्रकार की पूछताछ तक नहीं की है। शासकीय अधिवक्ता के आग्रह पर युगलपीठ ने समय प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता नीलेश कोटेछा तथा विकास गुप्ता ने पैरवी की। 
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