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जबलपुर: दूसरी शादी करने पर फिर दो बच्चों के लिए मिलना चाहिए मातृत्व अवकाश, हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
Tue, 22 Feb 2022 12:13 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 22 Feb 2022 12:13 PM IST
सार
हाईकोर्ट में दूसरी शादी करने के बाद पुन: दो बच्चों के लिए मातृत्व दिए जाने की मांग करते हुए याचिका दायर की गई है। याचिका पर अगली सुनवाई 28 फरवरी को निर्धारित की गई है।
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maternity leave
विस्तार
दूसरी शादी करने के बाद पुन: दो बच्चों के लिए मातृत्व दिए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। कहा गया है कि हाईकोर्ट में मप्र सिविल सर्विस अवकाश नियम के तहत सिर्फ दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश देने के प्रावधान है। हाईकेार्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एम एस भट्टी की युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 28 फरवरी को निर्धारित की है।
सिहोरा के पौडी कला में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका प्रियंका त्रिपाठी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनका पहला विवाह साल 2002 में हुआ था। पहले पति से उसके दो बच्चे हैं और परिवारिक विवाद के कारण उनका 2018 में तलाक हो गया था। तलाक के बाद 2021 में दूसरा विवाह कर लिया। याचिका में कहा गया था कि वह गर्भवती है और शीघ्र बच्चे को जन्म देने वाली है।
नियमानुसार सिर्फ दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान है। याचिका में इस नियम को चुनौती देते हुए कहा गया है कि दूसरी शादी करने पर पुनः दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश दिया जाना चाहिए। याचिका के साथ हरियाण हाईकोर्ट द्वारा इस संबंध में पारित आदेश की प्रति भी पेश की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंजली बैनर्जी ने पैरवी की।
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सिहोरा के पौडी कला में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका प्रियंका त्रिपाठी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनका पहला विवाह साल 2002 में हुआ था। पहले पति से उसके दो बच्चे हैं और परिवारिक विवाद के कारण उनका 2018 में तलाक हो गया था। तलाक के बाद 2021 में दूसरा विवाह कर लिया। याचिका में कहा गया था कि वह गर्भवती है और शीघ्र बच्चे को जन्म देने वाली है।
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नियमानुसार सिर्फ दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश देने का प्रावधान है। याचिका में इस नियम को चुनौती देते हुए कहा गया है कि दूसरी शादी करने पर पुनः दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश दिया जाना चाहिए। याचिका के साथ हरियाण हाईकोर्ट द्वारा इस संबंध में पारित आदेश की प्रति भी पेश की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंजली बैनर्जी ने पैरवी की।
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