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जबलपुर: न्यायाधीशों व न्यायिक कर्मचारियों को दिया जाए कोरोना वॉरियर्स का दर्जा, हाईकोर्ट प्रशासन की तरफ से जवाब पेश
Thu, 24 Feb 2022 08:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 24 Feb 2022 08:31 PM IST
सार
मुख्यमंत्री कोविड योजना के तहत न्यायाधीशों सहित न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों को कोरोना वॉरियर्स का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि कोरोना काल में जोखिम लेकर न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों ने कार्य किया है। उन्हें कोरोना वॉरियर्स का दर्जा दिया जाना चाहिए। सरकार की तरफ से जवाब पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एम एस भट्टी की युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 4 अप्रैल को निर्धारित की है।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : Social Media
विस्तार
एमपी जजेस एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि कोरोना काल में जिला न्यायालय सहित अधीनस्थ कोर्ट में न्यायाधिशों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जनता को न्याय दिए। याचिका में मांग की गई थी कि कोरोना कार्य में अपने सेवाएं देने वाले अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स की तरह उन्हें भी मुख्यमंत्री कोविड योजना का लाभ दिया जाए। कोरोना वायरस के संक्रमण में आने के कारण प्रदेश में 14 न्यायाधीशों की मृत्यु हुई है तथा लगभग 4 सौ न्यायाधीश संक्रमित हुए हैं। याचिका में संक्रमित न्यायाधीशों को सम्पूर्ण उपचार तथा मृतक न्यायाधीशों के परिजनों को पचास लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है।
याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की तरफ से बताया गया कि कोरोना काल में जोखिम लेकर न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों ने कार्य किया है। उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों के तहत योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने अगली सुनवाई 4 अप्रैल को निर्धारित की है।
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याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की तरफ से बताया गया कि कोरोना काल में जोखिम लेकर न्यायाधीशों व न्यायिक अधिकारियों ने कार्य किया है। उन्हें भी अन्य सरकारी कर्मचारियों के तहत योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार की तरफ से जवाब देने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने अगली सुनवाई 4 अप्रैल को निर्धारित की है।
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