{"_id":"6240406a1647c03bc0758842","slug":"jabalpur-innovation-of-power-company-help-of-drone-is-being-taken-to-find-fault-in-transmission-lines","type":"story","status":"publish","title_hn":"जबलपुर: पावर कंपनी का नवाचार, ट्रांसमिशन लाइनों में फॉल्ट का पता लगाने के लिए ली जा रही ड्रोन की मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जबलपुर: पावर कंपनी का नवाचार, ट्रांसमिशन लाइनों में फॉल्ट का पता लगाने के लिए ली जा रही ड्रोन की मदद
Sun, 27 Mar 2022 04:16 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 27 Mar 2022 04:16 PM IST
सार
मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीटीसीएल) ने हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में खराबी का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद लेने का फैसला किया है। उसकी उपयोगिता पर निगरानी की जा रही है।
विज्ञापन
ड्रोन
- फोटो : pixabay
विस्तार
मध्य प्रदेश में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में खराबी का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीटीसीएल) इसे प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। ड्रोन किराए पर लिए जा रहे हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसे बड़े पैमाने पर उपयोग में लाया जाएगा।
एमपीपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक सुनील तिवारी ने बताया कि जबलपुर और उसके आसपास घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और मैदानी इलाकों में एक साल के लिए ड्रोन को प्रायोगिक तौर इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रांसमिशन लाइनों में खराबी का पता लगाने के लिए पहले तकनीकी कर्मचारियों को टावरों पर चढ़ना होता है, जिससे समय बहुत लगता है। इसलिए ये कवायद की जा रही है। उन्होंने बताया कि हमारे इंजीनियर जनवरी से इसके संचालन नजर रखे हैं। ड्रोन की लागत, उपयोगिता का अध्ययन किया जा रहा है। यदि ये व्यवहारिक रहा, तो इसे स्थायी रूप से उपयोग किया जाएगा।
एमपीपीटीसीएल के प्रवक्ता और असिस्टेंट इंजीनियर शशिकांत ओझा ने कहा कि ड्रोन का उपयोग उत्साहजनक परिणाम दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ड्रोन के जरिए अमरकंटक क्षेत्र के पास एक बिजली लाइन में खराबी का पता लगाया था। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें मांग के आधार पर एक निजी कंपनी से ड्रोन मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आपूर्ति लाइन में कोई स्पार्किंग है, तो ड्रोन लाइन ट्रिप करने से पहले इसका पता लगा लेता है।
विज्ञापन
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के एक अधिकारी ने कहा कि एमपीपीटीसीएल उत्पादन स्टेशनों से वितरण कंपनियों को बिजली भेजता है, जहां से राज्य भर में लगभग एक करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है।
विज्ञापन
एमपीपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक सुनील तिवारी ने बताया कि जबलपुर और उसके आसपास घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और मैदानी इलाकों में एक साल के लिए ड्रोन को प्रायोगिक तौर इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रांसमिशन लाइनों में खराबी का पता लगाने के लिए पहले तकनीकी कर्मचारियों को टावरों पर चढ़ना होता है, जिससे समय बहुत लगता है। इसलिए ये कवायद की जा रही है। उन्होंने बताया कि हमारे इंजीनियर जनवरी से इसके संचालन नजर रखे हैं। ड्रोन की लागत, उपयोगिता का अध्ययन किया जा रहा है। यदि ये व्यवहारिक रहा, तो इसे स्थायी रूप से उपयोग किया जाएगा।
विज्ञापन
एमपीपीटीसीएल के प्रवक्ता और असिस्टेंट इंजीनियर शशिकांत ओझा ने कहा कि ड्रोन का उपयोग उत्साहजनक परिणाम दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ड्रोन के जरिए अमरकंटक क्षेत्र के पास एक बिजली लाइन में खराबी का पता लगाया था। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें मांग के आधार पर एक निजी कंपनी से ड्रोन मिलते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आपूर्ति लाइन में कोई स्पार्किंग है, तो ड्रोन लाइन ट्रिप करने से पहले इसका पता लगा लेता है।
विज्ञापन
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के एक अधिकारी ने कहा कि एमपीपीटीसीएल उत्पादन स्टेशनों से वितरण कंपनियों को बिजली भेजता है, जहां से राज्य भर में लगभग एक करोड़ उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है।
