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जबलपुर: पंचायत चुनाव में तय की जाए खर्च की सीमा, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Fri, 21 Jan 2022 07:34 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 21 Jan 2022 07:34 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए अधिकतम खर्च सीमा निर्धारित किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में होगी।
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए अधिकतम खर्च सीमा निर्धारित किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस सुनीता यादव की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे तथा रजत भार्गव की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि हाल में ही निरस्त हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगभग 250 करोड़ रुपये का व्यय उम्मीदवारों ने किया था। पंचायत चुनाव में उम्मीदवार द्वारा ज्यादा राशि व्यय की जाती है। वोटरों को आर्थिक प्रलोभन देकर खुद के पक्ष में मतदान के लिए लुभाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मप्र पंचायत निर्वाचन नियम में चुनाव खर्च की अंतिम सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।
याचिका में कहा गया था कि धन-बल से उम्मीदवार चुनाव नतीजे प्रभावित करते हैं। गरीब व मध्यमवर्गीय लोग चुनाव में अधिक व्यय नहीं कर पाते हैं। याचिका में कहा गया था कि पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने पार्षद चुनाव में अधिकतम चुनाव खर्च सीमा निर्धारित की है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने प्रदेश सरकार के विधि तथा पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमित सेठ ने पैरवी की।
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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे तथा रजत भार्गव की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि हाल में ही निरस्त हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगभग 250 करोड़ रुपये का व्यय उम्मीदवारों ने किया था। पंचायत चुनाव में उम्मीदवार द्वारा ज्यादा राशि व्यय की जाती है। वोटरों को आर्थिक प्रलोभन देकर खुद के पक्ष में मतदान के लिए लुभाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मप्र पंचायत निर्वाचन नियम में चुनाव खर्च की अंतिम सीमा तय करने का कोई प्रावधान नहीं है।
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याचिका में कहा गया था कि धन-बल से उम्मीदवार चुनाव नतीजे प्रभावित करते हैं। गरीब व मध्यमवर्गीय लोग चुनाव में अधिक व्यय नहीं कर पाते हैं। याचिका में कहा गया था कि पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने पार्षद चुनाव में अधिकतम चुनाव खर्च सीमा निर्धारित की है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने प्रदेश सरकार के विधि तथा पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव तथा चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमित सेठ ने पैरवी की।
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