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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Vidisha has been established as BJP's 'Vijay Dharohar', many big names have been made MPs by the people here.

Vidisha Loksabha: BJP की 'विजय धरोहर' के रूप स्थापित हुआ विदिशा, कई बड़े नामों को यहां की जनता ने बनाया सांसद

Sun, 28 Apr 2024 08:13 AM IST
दिनेश शर्मा कमलेश सेन
कमलेश सेन Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 28 Apr 2024 08:13 AM IST
सार

2024 के लोकसभा चुनाव में विदिशा लोकसभा क्षेत्र से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस से प्रताप भानु शर्मा हैं। इसके अलावा अन्य दलों के उम्मीदवार हैं। 

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Vidisha has been established as BJP's 'Vijay Dharohar', many big names have been made MPs by the people here.
विदिशा लोकसभा सीट पर कई दिग्गज नेता सांसद चुने गए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश का संसदीय क्षेत्र विदिशा 1967 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। इस संसदीय क्षेत्र को आठ विधानसभा क्षेत्रों से मिलाकर बनाया गया। रायसेन जिले से तीन, विदिशा से दो, सीहोर जिले से दो और देवास की एक सीट शामिल है। ऐतिहासिक महत्व के मान से सांची के बौद्ध स्तूप जो 1989 से विश्व धरोहर में सम्मिलित किए गए हैं। भोजपुर का विशाल शिव मंदिर, खातेगांव के समीप हंडिया और नेमावर में मां नर्मदा के घाट और विदिशा बेतवा नदी के समीप बसा होने से क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाता है। लोकसभा क्षेत्र में ये सभी स्थान सम्मिलित हैं। 
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क्षेत्र के सियासी इतिहास को देखें तो 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में जनसंघ के पंडित शिव शर्मा ने कांग्रेस के आर पांडेय को पराजित किया था। 1977 में विदिशा से देश के प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र के रामनाथ गोयनका ने जनसंघ के टिकट पर विजयाराजे सिंधिया के आग्रह पर चुनाव लड़ा। उन्होंने कांग्रेस के मणिभाई जे पटेल को पराजित किया था। 1977 में भारतीय लोकदल के राघवजी ने कांग्रेस के गुफराने आजम को एक लाख तेईस हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। 1980 में यह क्षेत्र जनसंघ के हाथ से कांग्रेस के पाले में पहुंच गया और 1980 में प्रतापभानु कृष्ण गोपाल ने राघव जी को 9553 मतों से हराया था। 1989 में राघवजी ने अपनी पराजय का बदला लिया और उन्होंने कांग्रेस के भानुप्रताप शर्मा को पराजित किया था।
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1989 में भारतीय जनता पार्टी के नेता अटलबिहारी वाजपेयी ने चुनाव लड़ा। उनके विरुद्ध कांग्रेस के प्रताप भानुकृष्ण गोपाल खड़े थे। वाजपेयी की 104134 मतों से रिकॉर्ड विजय हुई थी। 1996 से 2004 तक चार बार भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह विजय रहे थे। 2009 और 2014 में भाजपा की सुषमा स्वराज विजय रही थीं। 2019 में भाजपा के रमाकांत भार्गव ने कांग्रेस के शैलेन्द्र पटेल को पांच लाख से भी अधिक मतों से पराजित कर रिकॉर्ड बनाया था। पिछले 36 वर्षों से विदिशा संसदीय सीट पर भाजपा का वर्चस्व है।  
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विदिशा भाजपा और जनसंघ के लिए एक अभेद किला रहा है। भाजपा, जनसंघ या उसके द्वारा समर्थन दिए चुनाव में खड़े हुए उम्मीदवार को चुनाव में डाले गए वैध मतों में से पचास प्रतिशत या इससे अधिक मत मिले हैं। 2009 में भाजपा की सुषमा स्वराज को अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के मुकाबले 78.8 प्रतिशत मत मिले, जो एक रिकॉर्ड था। 2014 में सुषमा स्वराज को 66.53 प्रतिशत मत मिले थे। 2019 में भाजपा के रमाकांत भार्गव को 68.19 प्रतिशत मत मिले। इससे जाहिर है कि भाजपा का उम्मीदवार विरोधी उम्मीदवार से कहीं अधिक मत प्राप्त कर विजय प्राप्त करता है।

2024 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्र से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस से प्रताप भानु शर्मा हैं। इसके अलावा अन्य दलों के उम्मीदवार हैं। मुकाबला तो कांग्रेस और भाजपा में ही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की 8 सीटों में से भाजपा के पास 7 और सिलवानी से एक मात्र कांग्रेस को विजय प्राप्त हुई थी। विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र अनुसार भाजपा की 2 लाख 61 हजार 9 सौ 37 मतों की लीड रही थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में बुधनी से भाजपा के शिवराजसिंह चौहान की 1 लाख 4 हजार 9 सौ 74 मतों से विजय रही थी। विदिशा लोकसभा क्षेत्र में 7 मई को मतदान होना है। 



सीट से जुड़ी रोचक जानकारी
  • विजयाराजे सिंधिया के आग्रह पर रामनाथ गोयनका ने 1971 में जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ा था। सिंधिया ने उन्हें टिकट दिलवाया और चुनाव लड़वाया। गोयनका की 32064 मतों से विजय हुई थी। 
  • 1998 में शिवराज सिंह के विरुद्ध पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर शंकरदयाल शर्मा के पुत्र आशुतोष दयाल शर्मा कांग्रेस से उम्मीदवार थे।  
  • सबसे कम मतदान 2009 में 45.09 प्रतिशत और सबसे अधिक मतदान वर्ष 2019 में  71.19 प्रतिशत हुआ था। 
  • चुनावी मैदान में कम उम्मीदवार 1967 और 1971 में चार-चार खड़े थे, सर्वाधिक उम्मीदवार 1996 में 29 उम्मीदवार मैदान में थे।  
  • सबसे कम मतों से विजय 1980 में कांग्रेस के प्रतापभानु कृष्णगोपाल की 5080 मतों से और सर्वाधिक मतों से भाजपा के रमाकांत भार्गव की 503084 मतों से हुई थी।

2024 में क्षेत्र में मतदाता
पुरुष 10,04,249 
महिला 9,34,035 
थर्ड जेंडर 43 
कुल मतदाता 19,38,327
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