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Mann ki Baat: मोदी की प्रशंसा पाने के बाद आदिवासी युवती लहरी बाई बनी मिलेट क्रॉप्स की ब्रांड एबेंसडर

Sat, 29 Apr 2023 04:28 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sat, 29 Apr 2023 04:28 PM IST
सार

लहरी बताती हैं कि वे अपने माता-पिता की सेवा करना चाहती हैं, इसलिए शादी नहीं की। बचपन से ही उन्हें बीज इकट्ठा करने की ललक थी। वह जहां भी जाती थी, बीज एकत्र कर लेती थी।

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Tribal girl Lahari Bai became brand ambassador of Millet Crops after receiving praise from Modi
लहरी बाई। - फोटो : social media

विस्तार

डिंडोरी के छोटे से गांव मेें रहने वाली 27 वर्षीय लहरी बाई के जीवन में भी प्रधानमंत्री की मोदी की प्रशंसा पाने के बाद बदलाव आया था। वे हरे बीज बैंक चलाती हैं। मोटे अनाज की 25 से ज्यादा प्रजातियों के बीज वे आसपास के गांवों में बांटती हैं। प्रधानमंत्री ने लहरी का जिक्र मन की बात में किया था और उनके काम की प्रशंसा की थी। इसके बाद लहरी बाई डिंडोरी जिले में मिलेट्स क्रॉप्स की ब्रांड एबेंसडर बन गईं।

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फरवरी में वे इंदौर में जी-20 की बैठक में शामिल होने तक आ चुकी हैं। लहरी बताती हैं कि वे दस सालों से बीज बैंक संचालित करती हैं ,लेकिन मोदी की प्रशंसा पाने के बाद अब वे जिले में पहचान की मोहताज नहीं हैं। उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी मिल गया। पहले उसके लिए कई चक्कर काटे थे। जिले के कलेक्टर लहरी को सम्मानित भी कर चुके हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी जी-20 सम्मेलन में लहरी की प्रशंसा कर चुके हैं। लहरी राजनीति में हाथ आजमाना चाहती हैं।

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लहरी बताती हैं कि वे अपने माता-पिता की सेवा करना चाहती हैं, इसलिए शादी नहीं की। बचपन से ही उन्हें बीज इकट्ठा करने की ललक थी। वह जहां भी जाती थीं, बीज एकत्र कर लेती थीं। इस कारण उनके पास वे बीज भी आने लगे, जिनकी किस्में धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। उनके बीज बैंक में मोटे अनाज की करीब 60 किस्मों के बीज हैंं।

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लहरी बाई बाजरा के दुर्लभ संग्रह को संरक्षित करने के लिए अनाज उगाती हैं, जिसमें चावल की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। ज्वार छोटी बाजरा (कुटकी), (कंगनी), बाजरा भारत में पाई जाने वाली कई किस्मों में से एक हैं। यह सभी लहरी के पास मिल जाएंगी। 

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