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Indore News: इंदौर के मेघदूत उपवन घोटाला मामले में तत्कालीन एमआईसी मेंबर सहित 9 को तीन-तीन वर्ष कारावास

Tue, 31 Jan 2023 07:19 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 31 Jan 2023 07:19 PM IST
सार

नगर निगम का निर्माण 80 के दशक मेें इंदौर विकास प्राधिकरण ने किया था। कैलाश विजयवर्गीय जब महापौर बने तो आईडीए नेे नगर निगम को गार्डन को सौप दिया। इसके बाद नगर निगम ने ढाई करोड़ रुपये खर्च कर गार्डन का सौंदर्यीकरण किया था और उसे ठेके पर दे दिया।

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Three years imprisonment to 9 including the then MIC member in Meghdoot Upvan scam case of Indore
सांकेतिक फोटो - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

इंदौर के चर्चित मेघदूत उपवन घोटाले में स्पेशल कोर्ट ने एमआईसी मेेंबर, दो पूर्व पार्षद सहित 9 आरोपियों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। घोटाले की शिकायत 23 साल पहले पूर्व नेता प्रतिपक्ष छोटू शुक्ला ने लोकायुक्त में की थी। नगर निगम ने ढाई करोड़ रुपये खर्च कर गार्डन को अलग-अलग ठेकेदारों को ठेके पर दे दिया था। 
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मेघदूत उपवन घोटाले की लोकायुक्त शिकायत में आरोपी पूर्व एमआईसी मेंबर सूरज केरो के अलावा पूर्व पार्षद राजेंद्र सोनी, कैलाश यादव के अलावा  सुरेश कुमार जैन, तत्कालीन सहायक शिल्पज्ञ, अमानुल्ला खान तत्कालीन उद्यान अधीक्षक, केशव पंडित ठेकेदार मेघदूत कार्पोरेशन,  विद्यानिधि श्रीवास्तव तत्कालीन सीनियर आडिटर, ऋषिप्रसाद गौतम तत्कालीन सहायक संचालक, जगदीश डगांवकर, तत्कालीन नगर शिल्पज्ञ नगर है। मंगलवार को विशेष न्यायालय ने इस केस में फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। 
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ढाई करोड़ रुपये खर्च किए थे निगम ने
नगर निगम का निर्माण 80 के दशक मेें इंदौर विकास प्राधिकरण ने किया था। कैलाश विजयवर्गीय जब महापौर बने तो आईडीए नेे नगर निगम को गार्डन को सौप दिया। इसके बाद नगर निगम ने ढाई करोड़ रुपये खर्च कर गार्डन का सौंदर्यीकरण किया था और उसे ठेके पर दे दिया। ठेका भी कागजों पर किसी और को मिला था और संचालन कोई और कर रहा था।
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कांग्रेस ने किया था विरोध

मेघदूत उपवन ठेके पर देेने और  प्रवेश के लिए शुल्क लगाने का विरोध तक कांग्रेस ने किया था और  कांग्रेसी गार्डन बंद कराने भी पहुंचे थे। गार्डन का विकास कार्य पूरा होने के बाद आई तेज के कारण कृत्रिम तालाब के गेट टूट गए थे और  नुकसान भी हुआ था। बाद में नगर निगम ने वहां नाव चलाने की योजना टाल दी थी और मामला विवादों में आने के बाद ठेकेदार ने भी काम छोड़ दिया था। 

33 लाख की नुकसान निगम को हुआ

ठेेके पर देने के बाद इस मामले की शिकायत वर्ष 2003 में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष छोटू शुक्ला ने लोकायुक्त से की थी। शिकायत में कहा गया कि सरकार की मंजूरी के बिना छोटे-छोटे प्रस्ताव बनाकर अलग-अलग कार्य, अलग-अलग व्यक्तियों से करवाकर 33,60,322 रूपये की आर्थिक क्षति निगम को पहुंचाई थी। इस मामले में प्रकरण दर्ज कर वर्ष 2015 में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया था। नगर निगम ने मेघदूत गार्डन में म्यूजिकल फाउंटेन, तालाब, गुलाब गार्डन सहित अन्य काम किए थे। 20 से ज्यादा दुकानों का निर्माण भी कराया था। बाद में इसे ठेके पर दे दिया गया और  ठेकेदार उपवन में प्रवेश केे दस रुपये प्रति व्यकि्त वसूलने लगा। पार्किंग शुल्क के अलावा दुकानों का किराया भी ठेकेदार वसूल रहा था। 


9 आरोपियों को भेजा था जेल

लोकायुक्त पुुलिस ने सात हजार पेज का चालान पेश किया। इसके बाद  2015 मेें इस केस में सुनवाई हुई थी।  कोर्ट में आरोपियों ने जमानत याचिका लगाई थी। आरोपियों को उम्मीद थी कि जमानत मिल जाएगी, लेकिन कोर्ट ने याचिका निरस्त कर सभी 9 आरोपियों को जेल भेज दिया था। बाद में आरोपियों को जेल से जमानत मिली।

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