Indore: हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगम से पूछा-क्यों न पेड़ों को जीवित प्राणी घोषित किया जाए
याचिका ब्रिजों के निर्माण के लिए पेड़ों की हो रही कटाई के बारे में लगाई गई है। जिस ग्रीन बेल्ट को 20 साल पहले प्राधिकरण ने पूर्वी रिंग रोड पर विकसित किया। उसे अब नष्ट किया जा रहा है।
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इंदौर मेें ब्रिजों के निर्माण को लेकर काटे जा रहे दो हजार से ज्यादा पेड़ों के मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगी। जिस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी कर पूछा कि- क्यों न पेड़ों को जीवित प्राणी घोषित कर दिया जाए ताकि उनके अधिकार संरक्षित किए जा सकें। अब पक्षकारों को दो सप्ताह में जवाब देना है।
पूर्व उपमहाधिवक्ता अभिनव धनोतकर के माध्यम से यह याचिका डा. अमन शर्मा ने दायर की है। उसमें प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेसी बोस की लिखी पुस्तक का हवाला दिया गया। जिसमें कहा गया है कि-पेड़ का अपना तंत्रिका तंत्र होता है।पेड़ जीवित प्राणी की परिभाषा को पूरा करता है। उसका क्रमिक विकास होता है। वह उत्पादन कर सकते है।यदि पेड़ों को जीवित प्राणी घोषित कर दिया जाए तो उनके अधिकारों का संरक्षण किया जा सकता है। याचिका मेे कहा गया कि पेड़ों के लिए बनाए गए अधिनियमों मेें वृक्ष सरंक्षण अधिकारी निगमायुक्त है। उन्हें ही पेड़ काटने की अनुमति ही देना होती है। इस तरह पेड़ों का सरंक्षण नहीं हो सकता। पेड़ों के सरंक्षण के लिए अलग से एक कमेटी बनना चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दो सप्ताह मेें जवाब मांगा है।
ग्रीन बेल्ट पर ब्रिज
याचिका ब्रिजों के निर्माण के लिए पेड़ों की हो रही कटाई के बारे में लगाई गई है। जिस ग्रीन बेल्ट को 20 साल पहले प्राधिकरण ने पूर्वी रिंग रोड पर विकसित किया। उसे अब नष्ट किया जा रहा है। ग्रीन बेल्ट वाले हिस्से को ब्रिज निर्माण के लिए चुना गया है। यहां से सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके है। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी बिजों के लिए पेड़ों की कटाई जारी है।
