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Hockey: फुटपाथ पर हॉकी खेलने को मजबूर राष्ट्रीय खिलाड़ी, निगम ने इनके मैदान पर कचरा स्टेशन बनाया
Fri, 21 Apr 2023 07:24 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 21 Apr 2023 07:24 PM IST
सार
83 साल पुराने प्रकाश हाकी क्लब की कहानी, देश को सैंकड़ों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने के बाद मैदान के लिए मोहताज
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फुटपाथ पर हाकी खेलने को मजबूर
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
कहते हैं नक्सली क्षेत्र में खेल स्पर्धाएं आयोजित की जाएं तो वहां के युवा बंदूकें छोड़ हाकी और बल्ले थाम लेते हैं। दुनियाभर में कई बार इस तरह के उदाहरण देखने को भी मिले हैं जो यह बताते हैं कि खेलों का किसी इंसान और राष्ट्र के निर्माण में कितना महत्व है। इन सब उदाहरणों के बावजूद आज भी भारत में खेलों के प्रति उतनी गंभीरता नहीं हैं जितनी गंभीरता दुनिया के अन्य देशों में दिखाई देती है। इसी वजह से भारत आज भी खेलों के मामले में उन देशों से पीछे है जिनकी आबादी हमारे शहरों की आबादी से भी कम है। इंदौर का प्रकाश हॉकी क्लब वह क्लब है जिसने देश को सैंकड़ों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। 83 साल पुराने इस क्लब के युवा खिलाड़ियों को आज फुटपाथ पर खेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। रेसीडेंसी के सामने बने इस क्लब के मैदान को निगम ने कचरा ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए ले लिया है। अब इस क्लब के खिलाड़ी डेली कालेज के सामने फुटपाथ पर खेलने के लिए मजबूर हैं। इन खिलाड़ियों में कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी हैं जो यहीं पर अभ्यास कर रहे हैं।
दांत टूटे, करंट लगने और सड़क हादसों का खतरा
खिलाड़ियों ने बताया कि फुटपाथ पर अभ्सास के दौरान कई बार खिलाड़ियों के दांत टूट गए और उन्हें गंभीर चोट लग गई। सड़क पर तेज गति से वाहन चलते हैं जिनकी वजह से हादसे का खतरा रहता है। चारों तरफ बिजली के तार लगे हैं जो नीचे झूलते रहते हैं। इस तरह के खतरनाक हालात में उन्हें अभ्यास करना पड़ता है।
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1940 में शुरू हुआ था क्लब
प्रकाश हॉकी क्लब के सचिव देवकीनंदन सिलावट ने बताया कि हमारी तीसरी पीढ़ी इस क्लब का संचालन कर रही है। यहां पर रोज 150 खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। यह क्लब रेसीडेंसी के सामने 1940 से मौजूद था, बाद में 2016 में इसे वहां से हटा दिया गया।
45 साल से बच्चों को सिखा रहे हाकी
यहां पर 45 साल से बच्चों को हॉकी सिखा रहे एनआईएस कोच अशोक यादव ने बताया कि क्लब के 500 बच्चे राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार के रवैये से बेहद दुखी हैं। खेलों के लिए जगह देंगे तो देश का भविष्य बनेगा।
कचरा स्टेशन के पास बनाया मिनी ग्राउंड
निगम ने कचरा स्टेशन के पास मिनी खेल मैदान बनाया है लेकिन वहां पर खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं। कोच अशोक यादव ने बताया कि वहां पर पूरे समय कचरा स्टेशन की तेज बदबू आती है जिस वजह से वहां पर बैठना भी संभव नहीं होता।
मुख्यमंत्री से भी निवेदन कर चुके
भारतीय हॉकी टीम के कोच और अंतरराष्ट्रीय प्लेयर मीर रंजन नेगी भी यहां पर बच्चों को अभ्यास करवाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कई बार निवेदन कर चुके हैं लेकिन कहीं भी हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा उड़ीसा में नवीन पटनायक ने सिर्फ हाकी के माध्यम से पूरे राज्य की दशा बदल दी। वहां पर कई क्षेत्रों में नक्सली खत्म हो गए और युवा खेल खेलने लगे। नेगी ने कहा कि यदि वहां के 10 प्रतिशत प्रयास भी यहां पर कर दिए जाएं तो मप्र की दशा बदल जाएगी।
कतर, क्रोएशिया जैसे कई छोटे देश सिर्फ खेलों की वजह से जाने गए
नेगी ने कहा कि कतर, क्रोएशिया जैसे कई देश सिर्फ खेलों की वजह से दुनियाभर में पहचाने जाते हैं। खेलों की वजह से वहां पर टूरिज्म बढ़ता है अर्थव्यवस्था को फायदा होता है। भारत में भी इस बात को गंभीरता से समझना चाहिए।
मैं अपने ही शहर के लिए कुछ नहीं कर पाया
नेगी ने कहा कि मैंने देशभर में हाकी के लिए प्रोजेक्ट किए। मेरा सपना था कि सबसे अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैं इंदौर से ही निकालूंगा लेकिन मैं यहां पर कुछ भी नहीं कर सका। हमें मैदान जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दी गई।
यह दिग्गज निकले यहां से
मीर रंजन नेगी, हर्षदीप कपूर, संस्कृति सागवान जैसे खिलाड़ियों ने यहां से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
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दांत टूटे, करंट लगने और सड़क हादसों का खतरा
खिलाड़ियों ने बताया कि फुटपाथ पर अभ्सास के दौरान कई बार खिलाड़ियों के दांत टूट गए और उन्हें गंभीर चोट लग गई। सड़क पर तेज गति से वाहन चलते हैं जिनकी वजह से हादसे का खतरा रहता है। चारों तरफ बिजली के तार लगे हैं जो नीचे झूलते रहते हैं। इस तरह के खतरनाक हालात में उन्हें अभ्यास करना पड़ता है।
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1940 में शुरू हुआ था क्लब
प्रकाश हॉकी क्लब के सचिव देवकीनंदन सिलावट ने बताया कि हमारी तीसरी पीढ़ी इस क्लब का संचालन कर रही है। यहां पर रोज 150 खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। यह क्लब रेसीडेंसी के सामने 1940 से मौजूद था, बाद में 2016 में इसे वहां से हटा दिया गया।
45 साल से बच्चों को सिखा रहे हाकी
यहां पर 45 साल से बच्चों को हॉकी सिखा रहे एनआईएस कोच अशोक यादव ने बताया कि क्लब के 500 बच्चे राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हम सरकार के रवैये से बेहद दुखी हैं। खेलों के लिए जगह देंगे तो देश का भविष्य बनेगा।
कचरा स्टेशन के पास बनाया मिनी ग्राउंड
निगम ने कचरा स्टेशन के पास मिनी खेल मैदान बनाया है लेकिन वहां पर खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं। कोच अशोक यादव ने बताया कि वहां पर पूरे समय कचरा स्टेशन की तेज बदबू आती है जिस वजह से वहां पर बैठना भी संभव नहीं होता।
मुख्यमंत्री से भी निवेदन कर चुके
भारतीय हॉकी टीम के कोच और अंतरराष्ट्रीय प्लेयर मीर रंजन नेगी भी यहां पर बच्चों को अभ्यास करवाने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि हम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कई बार निवेदन कर चुके हैं लेकिन कहीं भी हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा उड़ीसा में नवीन पटनायक ने सिर्फ हाकी के माध्यम से पूरे राज्य की दशा बदल दी। वहां पर कई क्षेत्रों में नक्सली खत्म हो गए और युवा खेल खेलने लगे। नेगी ने कहा कि यदि वहां के 10 प्रतिशत प्रयास भी यहां पर कर दिए जाएं तो मप्र की दशा बदल जाएगी।
कतर, क्रोएशिया जैसे कई छोटे देश सिर्फ खेलों की वजह से जाने गए
नेगी ने कहा कि कतर, क्रोएशिया जैसे कई देश सिर्फ खेलों की वजह से दुनियाभर में पहचाने जाते हैं। खेलों की वजह से वहां पर टूरिज्म बढ़ता है अर्थव्यवस्था को फायदा होता है। भारत में भी इस बात को गंभीरता से समझना चाहिए।
मैं अपने ही शहर के लिए कुछ नहीं कर पाया
नेगी ने कहा कि मैंने देशभर में हाकी के लिए प्रोजेक्ट किए। मेरा सपना था कि सबसे अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैं इंदौर से ही निकालूंगा लेकिन मैं यहां पर कुछ भी नहीं कर सका। हमें मैदान जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दी गई।
यह दिग्गज निकले यहां से
मीर रंजन नेगी, हर्षदीप कपूर, संस्कृति सागवान जैसे खिलाड़ियों ने यहां से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
