Pahalgam Attack: ग्राउंड रिपोर्ट-बैकों से कर्ज पर कारें,खोले रेस्त्रा, पर्यटन ठप्प, अब किश्ते भरने पर संकट
कहा जाता है कि कश्मीर के मौसम और माहौल का कोई भरोसा नहीं होता। कभी भी बिगड़ जाता है। बीते दो-तीन सालों से घाटी का माहौल अच्छा था। सोनमर्ग टनल, श्रीनगर से कटरा तक रेलवे नेटवर्क घाटी की तरक्की के नए द्वारा खोल रहे थे।
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श्रीनगर में रहने वाले फाजिल वानी खाली हाथ बैठे थे। आतंकी हमले से पहले उनके हाथ कार के स्टेरिंग पर जमे रहते थे। पर्यटकों को घाटी घुमाने से उन्हें फुर्सत नहीं मिलती थी, लेकिन दो दिनों से गाड़ी खड़ी है। जो बुकिंग थी वो कैंसल हो गई।
फाजिल की चिंता यह है कि उन्होंने कार निजी बैंक से कर्ज लेकर ली थी। आते महीने किश्त भी भरना है और परिवार का खर्च भी उठाना है। अब वह सब कैसे होगा। फाजिल जैसी कहानी कश्मीर घाटी के कई युवकों की है। परिवहन घाटी के रोजगार का बड़ा जरिया है। किसी ने गाडि़यां बैंकों से कर्ज लेकर खरीदी तो किसी ने रेस्त्रां के लिए किराए पर जगह ली, लेकिन मुनाफा तो दूर किश्तें, किराया निकालना भी अब उन्हें मुश्किल नजर आ रहा है।
कहा जाता है कि कश्मीर के मौसम और माहौल का कोई भरोसा नहीं होता। कभी भी बिगड़ जाता है। बीते दो-तीन सालों से घाटी का माहौल अच्छा था। लंबे समय से कोई आतंकी घटना नहीं हुई थी। सोनमर्ग टनल, श्रीनगर से कटरा तक रेलवे नेटवर्क घाटी की तरक्की के नए द्वारा खोल रहे थे। पर्यटन भी तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन इस बार आतंकियों ने 26 पर्यटकों की जान ली और घाटी के पर्यटन सेक्टर को भी बेपटरी कर दिया। कटरा से श्रीनगर तक वंदे भारत मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी रेल विभाग ने कर रखी है। इससे घाटी में पर्यटन और तेजी से बढ़ता, लेकिन शायद यह आंतकियों को गंवारा नहीं था।
पहलगाम में होटल के लिए किराए पर ली बिल्डिंग
श्रीनगर के लालचौक में होटर संचालित करने वाले आमिर बताते है कि जो पर्यटक श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग आते है। वे पहलगाम में भी स्टे करते है। श्री नगर आने वाले 80 प्रतिशत पर्यटक पहलगाम जाते है। इस कारण वहां भी होटल सेक्टर काफी तेजी से पनपने लगा था। अच्छे बिजनेस की संभावना के चलते हमने पहलगाम में एक बिल्डिंग किराए पर ली है। जिसका सालाना किराया एक करोड़ रुपये है। हमनें होटल के हिसाब से बिल्डिंग को डिजाइन किया। दो माह बाद होटल शुरू करने वाले थे, लेकिन इस घटना ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
किया किसी और ने कीमत हम कश्मिरियों को चुकाना पड़ रही है। श्रीनगर की सुल्तान हाउस बोट के कर्मचारी तारिक कहते है कि अब तीन सालों में डल झील इतनी सूनी नहीं देखी। कोरोना और धारा 370 हटने के कारण श्रीनगर में पर्यटन कम रहा। तीन सालों से पर्यटकों की रौनक बढ़ी थी, लेकिन अब सिलसिला फिर थम गया। न जाने कश्मीर को किसकी नजर लग गई।
