MP Politics: अक्षय बम के BJP में शामिल होने पर सुमित्रा ताई बोली, ये कोई बड़े नेता नहीं, हमें क्या फायदा इनसे
MP Politics: देश की राजनीति में अपनी सादगी और शुचिता के लिए अलग पहचान रखने वाली पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के एक झटके ने नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन सामने वाले अक्षय कांति बम के सुर बदलवा दिए हैं।
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अक्षय रविवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गी की मौजूदगी में फिर मीडिया से रूबरू है और कांग्रेस पर तमाम आरोप जड़े। उनका कहना था कि मेरी तो चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी थी, लेकिन मुझे कांग्रेस संगठन और नेताओं से किसी तरह का सहयोग नहीं मिल रहा था। उम्मीदवारी घोषित होने के अगले दिन 24 मार्च को जब मैं गांधी भवन गया तो वहां की उपस्थिति देखकर ही मुझे बहुत कुछ समझ में आने लगा था। लोकसभा जैसा बड़ा चुनाव में अपनी व्यक्तिगत टीम के भरोसे लड़ नहीं सकता था। मुझे संगठन और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की मदद की दरकार थी, लेकिन वह चुनाव से दूरी बनाकर चलने लगे थे। मुझे किसी का सपोर्ट नहीं मिल रहा था और एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत मुझे जानबूझकर डैमेज किया जा रहा था। अक्षय आधा घंटे तक सफाई देते रहे।
बम के इस बोल वचन को सुमित्रा महाजन के कड़े बोल के बाद निर्मित हुई परिस्थितियों के साथ ही भाजपा के एक बड़े वर्ग में पैदा हुई नाराजी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्टी एक बड़ा वर्ग जो अभी तक चुनाव में अहम भूमिका निभा रहा था, अब चुनाव से दूरी बनाकर चल रहा है। इन नेताओं का कहना है कि जब इतने अहम मुद्दे पर पार्टी ने हमसे बात करना उचित नहीं समझा तो फिर हम क्यों उत्साह दिखाएं। पार्टी के कुछ नेता तो यह भी कह रहे हैं कि बम को कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला भाजपा में लाए हैं अब वे ही उन्हें संभाले।
वीडी शर्मा ने ग्वालियर में कहा सुमित्रा महाजन की चिंता सही
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने ग्वालियर में कहा कि सुमित्रा महाजन ने जो चिंता जताई है वह सही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चिंता कांग्रेस के उम्मीदवार द्वारा इस तरह नामांकन वापस लिए जाने को लेकर है।
हाशिये पर विशाल पटेल और संजय शुक्ला
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दोनों पूर्व विधायक विशाल पटेल और संजय शुक्ला की लोकसभा चुनाव के दौर में भाजपा में कोई पूछ परख नहीं है। इंदौर-1 में जहां से कैलाश विजयवर्गीय विधायक हैं, शुक्ला को लोकसभा चुनाव से पूरी तरह दूर रखा गया है। वहीं देपालपुर में मनोज पटेल के दबाव के चलते विशाल पटेल को कोई अहम भूमिका नहीं दी गई है। इन दोनों नेताओं के समर्थकों की भी कहीं पूछ परख नहीं हो रही है।
