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MP News: मालवा-निमाड़ में मानसून गायब, किसान बेहाल,सोयाबीन पर कीटों का कहर
Thu, 07 Aug 2025 10:04 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Thu, 07 Aug 2025 10:04 AM IST
सार
मालवा और निमाड़ अंचल में इस साल मानसून बेहद कमजोर रहा है। इंदौर में अब तक सामान्य से 209.9 मिमी कम बारिश हुई है, जिससे खेतों में फसलें मुरझाने लगी हैं और सोयाबीन पर कीटों का हमला बढ़ गया है।
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अगस्त में भी बढ़ रहा है पारा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मालवा और निमाड़ अंचल इस बार मानसून की बेरुखी से जूझ रहा है। वर्षाकाल को डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन अब तक इस पूरे क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। सावन माह भी बारिश के बिना और गर्मी के बीच गुजर रहा है। मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है। खेतों में फसलें मुरझा रही हैं, वहीं खर्चीली सोयाबीन की फसल पर कीट प्रकोप की समस्या भी उभरने लगी है।
मानसून का बिगड़ा मिजाज, गिरता बारिश स्तर
मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में 1990 से 2010 के बीच औसतन 46 बारिश के दिन होते थे, लेकिन हाल के वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से घटा है। जलवायु परिवर्तन के पीछे विकास की अंधी दौड़, हरियाली का क्षरण, और शहरीकरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बाग-बगीचों की जगह कंक्रीट की सड़कों और इमारतों ने ले ली है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन गहराता जा रहा है।
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पांच लाख पेड़ कटे, स्मृति मार्ग और मिल क्षेत्र में भी पेड़ों की बलि
IIT इंदौर की रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ वर्षों में शहर में पांच लाख से अधिक पेड़ों की कटाई हो चुकी है। कभी स्मृति मार्ग और हुकमचंद मिल परिसर हरे-भरे जंगल जैसे दिखते थे, लेकिन चौड़ी सड़कों और मेट्रो परियोजनाओं के चलते इन क्षेत्रों में हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। मेट्रो निर्माण के दौरान रानी सराय और अहिल्या लाइब्रेरी के पास भी 1240 पेड़ों को हटाने की योजना है, जिसमें 1202 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
पर्यावरणविद बोले– विकास की योजनाएं प्रकृति के साथ चलें
पर्यावरणविद् डॉ. ओ. पी. जोशी ने बताया कि इंदौर में जिस तेजी से शहरी विस्तार हुआ है, उससे हरित क्षेत्र सिमटता गया है। जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और सीमेंट की सड़कों के कारण बारिश का पानी जमीन में समाने की जगह बहकर निकल जाता है। उन्होंने चेताया कि एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स 4.9 पर पहुंचना खतरे की घंटी है और यह दर्शाता है कि विकास की योजनाएं बिना पर्यावरण संरक्षण के बनाई जा रही हैं।
ये भी पढ़ें: 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन पर मिलेगा शगुन, आज नरसिंहगढ़ से होगा 1859 करोड़ का अंतरण
तालाब, कुएं और बोरिंग भी सूखने लगे
अल्पवर्षा के चलते शहर के जल स्रोतों की हालत भी बिगड़ गई है। कई तालाब, कुएं और बोरिंग का जल स्तर गिर गया है। भूजल की चौथी परत, जो लगभग 440 फीट गहराई पर है, वहां तक पानी नहीं पहुंच रहा। शहर की जलापूर्ति का भविष्य अब नर्मदा जल परियोजना पर ही टिका हुआ है।
बारिश के आंकड़े और आने वाले दिनों की संभावना
सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से हुई थी। 6 अगस्त तक इस महीने में केवल 138.2 मिमी (5.5 इंच) बारिश हुई है, जिसमें 11 दिन पूरी तरह सूखे रहे और केवल चार दिन ही आधा इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई। पूरे वर्षा काल में अब तक 292.9 मिमी (11.5 इंच) बारिश हुई है, जो औसत से 209.9 मिमी कम है। मौसम विभाग के मुताबिक 10 अगस्त के बाद ही अच्छी बारिश की संभावना है, फिलहाल हल्की बूंदाबांदी जारी रह सकती है।
किसानों की चिंता बढ़ी, फसलों पर कीटों का हमला
उज्जैन के किसान धर्मेंद्र पांचाल के अनुसार बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल में इल्लियों का प्रकोप बढ़ गया है। मक्का और सब्जियों में भी कीट लगने की समस्या सामने आ रही है। गर्मी के कारण फसलें सूखने लगी हैं। किसान अब रबी फसलों को लेकर भी चिंतित हैं।
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मानसून का बिगड़ा मिजाज, गिरता बारिश स्तर
मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में 1990 से 2010 के बीच औसतन 46 बारिश के दिन होते थे, लेकिन हाल के वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से घटा है। जलवायु परिवर्तन के पीछे विकास की अंधी दौड़, हरियाली का क्षरण, और शहरीकरण को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बाग-बगीचों की जगह कंक्रीट की सड़कों और इमारतों ने ले ली है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन गहराता जा रहा है।
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पांच लाख पेड़ कटे, स्मृति मार्ग और मिल क्षेत्र में भी पेड़ों की बलि
IIT इंदौर की रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ वर्षों में शहर में पांच लाख से अधिक पेड़ों की कटाई हो चुकी है। कभी स्मृति मार्ग और हुकमचंद मिल परिसर हरे-भरे जंगल जैसे दिखते थे, लेकिन चौड़ी सड़कों और मेट्रो परियोजनाओं के चलते इन क्षेत्रों में हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। मेट्रो निर्माण के दौरान रानी सराय और अहिल्या लाइब्रेरी के पास भी 1240 पेड़ों को हटाने की योजना है, जिसमें 1202 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
पर्यावरणविद बोले– विकास की योजनाएं प्रकृति के साथ चलें
पर्यावरणविद् डॉ. ओ. पी. जोशी ने बताया कि इंदौर में जिस तेजी से शहरी विस्तार हुआ है, उससे हरित क्षेत्र सिमटता गया है। जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और सीमेंट की सड़कों के कारण बारिश का पानी जमीन में समाने की जगह बहकर निकल जाता है। उन्होंने चेताया कि एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स 4.9 पर पहुंचना खतरे की घंटी है और यह दर्शाता है कि विकास की योजनाएं बिना पर्यावरण संरक्षण के बनाई जा रही हैं।
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तालाब, कुएं और बोरिंग भी सूखने लगे
अल्पवर्षा के चलते शहर के जल स्रोतों की हालत भी बिगड़ गई है। कई तालाब, कुएं और बोरिंग का जल स्तर गिर गया है। भूजल की चौथी परत, जो लगभग 440 फीट गहराई पर है, वहां तक पानी नहीं पहुंच रहा। शहर की जलापूर्ति का भविष्य अब नर्मदा जल परियोजना पर ही टिका हुआ है।
बारिश के आंकड़े और आने वाले दिनों की संभावना
सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से हुई थी। 6 अगस्त तक इस महीने में केवल 138.2 मिमी (5.5 इंच) बारिश हुई है, जिसमें 11 दिन पूरी तरह सूखे रहे और केवल चार दिन ही आधा इंच से अधिक वर्षा दर्ज की गई। पूरे वर्षा काल में अब तक 292.9 मिमी (11.5 इंच) बारिश हुई है, जो औसत से 209.9 मिमी कम है। मौसम विभाग के मुताबिक 10 अगस्त के बाद ही अच्छी बारिश की संभावना है, फिलहाल हल्की बूंदाबांदी जारी रह सकती है।
किसानों की चिंता बढ़ी, फसलों पर कीटों का हमला
उज्जैन के किसान धर्मेंद्र पांचाल के अनुसार बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल में इल्लियों का प्रकोप बढ़ गया है। मक्का और सब्जियों में भी कीट लगने की समस्या सामने आ रही है। गर्मी के कारण फसलें सूखने लगी हैं। किसान अब रबी फसलों को लेकर भी चिंतित हैं।
