Loksabha Election: झाबुआ लोकसभा सीट-भाजपा ने क्षेत्रीय समीकरणों को साधा, कांग्रेस को परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा
17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार ही रतलाम झाबुआ सीट से गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीते है। जनसंघ और भाजपा के लिए यह सीट हमेशा चुनौति रही है। दिलीप सिंह भूरिया सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस के सांसद रहे।
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झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट प्रदेश के आदिवासी वोटरों का मिजाज चुनाव में बताती है। आजादी के बाद के ज्यादातर वर्षों में कांग्रेस ने इस सीट पर राज किया, लेकिन अब भाजपा की जमीन भी यहां तैयार हो चुकी है। इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अपने परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा है, लेकिन 40 साल बाद भाजपा ने आलीराजपुर क्षेत्र से टिकट देकर क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है और महिला उम्मीदवार को टिकट देने का प्रयोग भी किया है। अब देखना है कि भाजपा के यह दोनो प्रयोग क्या रंग लाते है।
कांग्रेस ने अभी इस सीट पर अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है, लेकिन कांतिलाल भूरिया ने काफी पहले यहां से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने दावेदारी नहीं की और बेटे को चुनाव लड़ाया।
भूरिया को झाबुआ व आसपास के क्षेत्रों और भील समाज के वोटबैंक पर भरोसा है। यहां से कांग्रेस को हमेशा ज्यादा वोट मिले है। भाजपा ने आलीराजपुर क्षेत्र में रहने वाली अनिता नागर सिंह चौहान को टिकट दिया है। उनके पति नागर सिंह चौहान वन मंत्री है।
इससे आलीराजपुर क्षेत्र के वोटबैंक को भाजपा ने साधने की कोशिश की है। रतलाम शहर और ग्रामीण की विधानसभा सीट से भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कराई है। वहां से लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को मदद की उम्मीद है। इस लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती है। उनमें से चार सीटें भाजपा के कब्जे में है,जबकि तीन सीट कांग्रेस के पास है। सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
कांग्रेस का गढ़ रही है झाबुआ सीट
17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार ही रतलाम झाबुआ सीट से गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीते है। जनसंघ और भाजपा के लिए यह सीट हमेशा चुनौति रही है। दिलीप सिंह भूरिया सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस के सांसद रहे। फिर वर्ष 2014 में दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में आए और चुनाव जीते, लेकिन उनके निधन के कारण उपचुनाव हुआ और कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत दर्ज कराई। 2019 में डामोर ने फिर यह सीट कांग्रेस से छिनी ली।
तीसरी बार महिला उम्मीदवार का प्रयोग
इस सीट पर अभी तक तीन बार महिला उम्मीदवार को राजनीतिक दलों ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने 1962 में पहली बार महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। तब जमुनादेवी चुनाव जीती थी। तब यह सीट चर्चा में आई थी। इस सीट पर 1962 में टिकट बदलते हुए अमर सिंह के स्थान पर जमुना देवी को उम्मीदवार बनाया था। 2004 में दिलीप सिंह भूरिया के बजाए रेलम सिंह चौहान को टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाई। अब भाजपा ने फिर महिला को टिकट दिया है।
झाबुआ लोकसभा सीट के विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणाम
आलीराजपुर- भाजपा
झाबुआ-कांग्रेस
जोबट- कांग्रेस
थांदला-कांग्रेस
पेटलावद-बीजेपी
रतलाम- भाजपा
रतलाम ग्रामीण-बीजेपी
सैलाना- भारत आदिवासी पार्टी
यह है झाबुअ लोकसभा सीट का लेखा जोखा
साल सांसद पार्टी
1952 अमर सिंह कांग्रेस
1957 अमर सिंह कांग्रेस
1962 जमुना देवी कांग्रेस
1967 सुरसिंह भूरिया कांग्रेस
1972 भागीरथ भंवर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
1977 भागीरथ भंवर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
1980 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस
1984 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस
1990 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस
1991 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस
1996 दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस
1998 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस
1999 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस
2004 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस
2014 दिलीप सिंह भूरिया भाजपा
2015 कांतिलाल भूरिया कांग्रेस
2019 गुमान सिंह डामोर भाजपा
