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Loaksabha Election: वर्ष 2009 के परिसीमन के बाद बदल गए धार और खरगोन लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण

Tue, 16 Apr 2024 08:50 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 16 Apr 2024 08:50 PM IST
सार

दोनो सीटें कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन वर्ष 2009 में हुए परिसीमन के बाद दोनो सीटों पर राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, हालांकि वर्ष 2009 में धार से कांग्रेस के उम्मीदवार गजेंद्र राजूखेड़ी चुनाव जीत गए थे, लेकिन लीड का अंतर 2661 वोट था।

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Loaksabha Election: Political equations changed in Dhar and Khargone Lok Sabha constituencies after the delimi
मालवा निमाड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनाव के दौरान क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। थोकबंद वोटबैंक वाले क्षेत्र यदि दूसरे लोकसभा क्षेत्र में जुड़ जाए तो फिर वर्षों से बनी राजनीतिक पकड़ कमजोर होना तय है। मालवा निमाड़ की धार और खरगोन लोकसभा सीट के साथ भी यही हुआ।

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दोनो सीटें कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन वर्ष 2009 में हुए परिसीमन के बाद दोनो सीटों पर राजनीतिक बदलाव देखने को मिला, हालांकि वर्ष 2009 में धार से कांग्रेस के उम्मीदवार गजेंद्र राजूखेड़ी चुनाव जीत गए थे, लेकिन लीड का अंतर 2661 वोट था। तब यह प्रदेश की सबसे कम वोटों की जीत थी,लेकिन फिर वर्ष 2014 के बाद कांग्रेस कभी इस सीट पर कब्जा नहीं जमा पाई। परिसीमन के बाद धार लोकसभा सीट में इंदौर जिले की महू विधानसभा सीट भी जुड़ गई थी।

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परिसीमन के कारण अरुण यादव को खंडवा से लड़ना पड़ा

खरगोन लोकसभा क्षेत्र वर्ष 2009 के पहले अनारक्षित था। वर्ष 2004 में भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था। वे चुनाव जीत गए, लेकिन लाभ के दो पदों के कारण उनकी सांसदी छिन गई। वर्ष 2007 में खरगोन में फिर उपचुनाव हुए, लेकिन तब मोघे का सामना कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री रहे सुभाष यादव के बेटे अरुण यादव से हुआ।

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यादव ने मोघे को डेढ़ लाख वोटों के अंतर से हराकर राजनीति में अपनी धमाकेदार शुरूआत की,लेकिन वर्ष 2009 में वे खरगोन लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ पाए,क्योकि परिसीमन के कारण बड़वाह और भगवानपुरा विधानसभा खंडवा लोकसभा क्षेत्र में जुड़ गई और खरगोन लोकसभा सीट एसटी सीट हो गई।


कहा जाता है कि तब एससी सीट छिंदवाड़ा होने वाली थी, लेकिन फिर खरगोन लोकसभा सीट में बदलाव कर उसे एससी श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया। वर्ष 2009 में अरुण यादव खंडवा से लड़े और चुनाव भी जीत गए, लेकिन वर्ष 2014 में वे खंडवा लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। परिसीमन के बाद वर्ष 2009 से खरगोन लोकसभा सीट भाजपा के कब्जे में है।

 

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