{"_id":"657f198d94bc93ff8e0f2cd3","slug":"lit-chowk-season-3-lyricist-swanand-kirkire-said-bollywood-is-the-art-of-the-masses-it-always-feels-new-2023-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lit Chowk Season 3: गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा- बॉलीवुड जनमानस की कला है, उसे हमेशा नयापन लगता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lit Chowk Season 3: गीतकार स्वानंद किरकिरे ने कहा- बॉलीवुड जनमानस की कला है, उसे हमेशा नयापन लगता है
Sun, 17 Dec 2023 09:23 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 17 Dec 2023 09:23 PM IST
सार
इंदौर में आयोजित लिट चौक में गीतकर स्वानंद किरकिरे पहुंचे। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के गीत बॉलीवुड लोक संगीत है। इसमें आम बोलचाल की भाषा होती है, इसलिए गीतों से समृद्ध भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती है। फिल्म की थीम और कैरेक्टर के हिसाब गीत लिखना पड़ता है।
विज्ञापन
लिट चौक में पहुंचे स्वानंद किरकिरे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लिट चौक सीजन-3 का समापन रविवार को हुआ। समापन सत्र के वक्ता गीतकार स्वानंद किरकिरे थे। उन्होंने इंदौर से जुड़ी यादों के किस्से साझा किए और फिल्मों से जुड़ी बातें भी बताई। स्वानंद ने कहा कि गीतों की समझ और भाषा इंदौर से मिली है। यहां से जो बटोरकर ले गया, उसी को सजा-धजा के मैंने अपनी दुकान सजाई।
स्वानंद ने कहा कि बॉलीवुड के गीत बॉलीवुड लोक संगीत है। इसमें आम बोलचाल की भाषा होती है, इसलिए गीतों से समृद्ध भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती है। फिल्म की थीम और कैरेक्टर के हिसाब गीत लिखना पड़ता है। मुन्ना भाई एमबीबीएस के गीतों में भाषा मुम्बइया थी, लेकिन गीत की आत्मा इंदौर की थी। जो दर्शक चाहते है फिल्में उसे ध्यान में रख कर बनाई जाती है। बॉलीवुड को हमेशा कुछ नया लगता है। बॉलीबुड जनमानस की कला है। मुझे भाषा का शुद्ध रूप और अपभ्रंश दोनों अच्छे लगते है। मैं शब्दों का नहीं, मैं काव्य और रस का कवि हूं।
स्वानंद ने सुनाए गीत
संवाद के अलावा स्वानंद ने अपने लिखे गीत भी सुनाए। थ्री इडियट फिल्म का बहती हवा सा था वो..और पिया बोले पिया बोले, तू किसी रेल से गुजरती है। गीत भी गाकर सुनाया। इसके अलावा उन्होंने अपनी कविताएं भी सुनाई।
विज्ञापन
अभिनेता रवि किशन ने कहा काला कैमरा मेरी ऑक्सीजन है
फिल्म अभिनेता रवि किशन ने भी लिट चौक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं दो यात्राओं में शामिल हूं। नेता के तौर पर और अभिनेता के तौर पर। जब कोई मुझसे उम्मीद लगाता है और पूरी होने पर जो ख़ुशी उन लोगों को मिलती है। वो मुझे संतोष देती है और मेरी ऑक्सीजन काला कैमरा है। वो मुझे सांसें देता है। काला कैमरा और मेकअप की खुशबू मुझमें उत्साह भर देती है। शाकाहार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इंसान के दांत मांसाहार के हिसाब से नहीं हैं। हम चर्बी पचा नहीं सकते हैं। यह भ्रम है कि मांस खाने से बलशाली होते हैं।
विज्ञापन
स्वानंद ने कहा कि बॉलीवुड के गीत बॉलीवुड लोक संगीत है। इसमें आम बोलचाल की भाषा होती है, इसलिए गीतों से समृद्ध भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती है। फिल्म की थीम और कैरेक्टर के हिसाब गीत लिखना पड़ता है। मुन्ना भाई एमबीबीएस के गीतों में भाषा मुम्बइया थी, लेकिन गीत की आत्मा इंदौर की थी। जो दर्शक चाहते है फिल्में उसे ध्यान में रख कर बनाई जाती है। बॉलीवुड को हमेशा कुछ नया लगता है। बॉलीबुड जनमानस की कला है। मुझे भाषा का शुद्ध रूप और अपभ्रंश दोनों अच्छे लगते है। मैं शब्दों का नहीं, मैं काव्य और रस का कवि हूं।
विज्ञापन
स्वानंद ने सुनाए गीत
संवाद के अलावा स्वानंद ने अपने लिखे गीत भी सुनाए। थ्री इडियट फिल्म का बहती हवा सा था वो..और पिया बोले पिया बोले, तू किसी रेल से गुजरती है। गीत भी गाकर सुनाया। इसके अलावा उन्होंने अपनी कविताएं भी सुनाई।
विज्ञापन
अभिनेता रवि किशन ने कहा काला कैमरा मेरी ऑक्सीजन है
फिल्म अभिनेता रवि किशन ने भी लिट चौक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मैं दो यात्राओं में शामिल हूं। नेता के तौर पर और अभिनेता के तौर पर। जब कोई मुझसे उम्मीद लगाता है और पूरी होने पर जो ख़ुशी उन लोगों को मिलती है। वो मुझे संतोष देती है और मेरी ऑक्सीजन काला कैमरा है। वो मुझे सांसें देता है। काला कैमरा और मेकअप की खुशबू मुझमें उत्साह भर देती है। शाकाहार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इंसान के दांत मांसाहार के हिसाब से नहीं हैं। हम चर्बी पचा नहीं सकते हैं। यह भ्रम है कि मांस खाने से बलशाली होते हैं।
