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Indore News: पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने कहा- हमारी सेना में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाना चाहिए
Sun, 11 May 2025 08:00 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 11 May 2025 08:00 PM IST
सार
Indore: इंदौर में अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने 25% महिला भागीदारी की मांग की और बताया कि कैसे महिला अधिकारियों ने कठिन ट्रेनिंग झेली, भेदभाव से लड़ी और सेना में विश्वास अर्जित किया।
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अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला को संबोधित करतीं अनुमा आचार्य
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर में अभ्यास मंडल की 64वीं व्याख्यानमाला का शुभारंभ हो चुका है। रविवार को वायुसेना की पूर्व विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने भारतीय सेनाओं में महिलाओं की भूमिका विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सेना में महिलाओं की स्थिति अच्छी है, लेकिन उनकी संख्या बढ़ाई जाना चाहिए। कम से कम 25 प्रतिशत महिलाएं सेना में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सेना विश्व की सबसे बेहतर है, क्योंकि ट्रेनिंग के साथ हमारी सेना में जज्बा भी है।
उन्होंने कहा कि 33 सालों के बाद अब महिलाओं को सेना अध्यक्ष बनते हुए देखेंगे। एनडीए के जरिए भी सेना में महिलाएं जा रही हैं। महिलाओं को ट्रेनिंग देकर सेना उन्हें एक धरोहर बनाती है और वे बेहतर तरीके से काम करती हैं।
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पूर्व विंग कमांडर आचार्य ने बताया कि सेना में भर्ती के समय नेतृत्व श्रमता, समस्याओं से निपटने का तरीका, सकारात्मकता देखी जाती है। जब सेना में महिलाओं के लिए भर्ती निकली गई तो पद नौ थे, लेकिन अभ्यर्थी पचास हजार। पहली बार में तो मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ, लेकिन दूसरी बार एयरफोर्स एकेडमी में चयन हुआ। एयरफोर्स ने पहली बैच की महिला अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों ने बेटियों जैसा रखा, लेकिन ट्रेनिंग में कोई भेदभाव नहीं किया। हमें पुरुषों की तरह सख्त ट्रेनिंग दी गई। हम वर्दी पहनते हैं तो डर गायब हो जाता था, लेकिन महिला अधिकारियों को परमानेंट सर्विस कमीशन के लिए कोर्ट तक लड़ाई लड़ना पड़ी, लेकिन हमारी जीत हुई। उन्होंने बताया कि महिला अधिकारियों पर सैनिक ज्यादा विश्वास करते हैं। उनसे मदद मांगते हैं।
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उन्होंने कहा कि 33 सालों के बाद अब महिलाओं को सेना अध्यक्ष बनते हुए देखेंगे। एनडीए के जरिए भी सेना में महिलाएं जा रही हैं। महिलाओं को ट्रेनिंग देकर सेना उन्हें एक धरोहर बनाती है और वे बेहतर तरीके से काम करती हैं।
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पूर्व विंग कमांडर आचार्य ने बताया कि सेना में भर्ती के समय नेतृत्व श्रमता, समस्याओं से निपटने का तरीका, सकारात्मकता देखी जाती है। जब सेना में महिलाओं के लिए भर्ती निकली गई तो पद नौ थे, लेकिन अभ्यर्थी पचास हजार। पहली बार में तो मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ, लेकिन दूसरी बार एयरफोर्स एकेडमी में चयन हुआ। एयरफोर्स ने पहली बैच की महिला अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों ने बेटियों जैसा रखा, लेकिन ट्रेनिंग में कोई भेदभाव नहीं किया। हमें पुरुषों की तरह सख्त ट्रेनिंग दी गई। हम वर्दी पहनते हैं तो डर गायब हो जाता था, लेकिन महिला अधिकारियों को परमानेंट सर्विस कमीशन के लिए कोर्ट तक लड़ाई लड़ना पड़ी, लेकिन हमारी जीत हुई। उन्होंने बताया कि महिला अधिकारियों पर सैनिक ज्यादा विश्वास करते हैं। उनसे मदद मांगते हैं।
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अभ्यास मंडल की व्याख्यानमाला में उपस्थित बुद्धिजीवी
- फोटो : अमर उजाला
छुट्टी का धब्बा न लगे, इसलिए दूसरा बच्चा पैदा नहीं किया
उन्होंने बताया कि पहली बैच की 70 प्रतिशत महिला अधिकारियों ने दूसरा बच्चा पैदा नहीं किया, क्योंकि महिला अधिकारियों के बारे में ये न कहा जाए कि ये अधिकारी तो मेटरनिटी लिव पर रहती है। सेना में डॉक्टर के रूप में महिला अधिकारी शुरू से रही है, लेकिन दूसरी शाखाओं में बाद में सेवाएं दी गई। व्याख्यानमाला का संचालन मनीषा गौर ने किया। आभार रामेश्वर गुप्ता ने माना।
उन्होंने बताया कि पहली बैच की 70 प्रतिशत महिला अधिकारियों ने दूसरा बच्चा पैदा नहीं किया, क्योंकि महिला अधिकारियों के बारे में ये न कहा जाए कि ये अधिकारी तो मेटरनिटी लिव पर रहती है। सेना में डॉक्टर के रूप में महिला अधिकारी शुरू से रही है, लेकिन दूसरी शाखाओं में बाद में सेवाएं दी गई। व्याख्यानमाला का संचालन मनीषा गौर ने किया। आभार रामेश्वर गुप्ता ने माना।
