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Indore: पीथमपुर मेें एक साथ नहीं जलेगा यूका का कचरा, छह माह तक धीरे-धीरे होगा निपटान, बनाया प्लेटफार्म

Tue, 31 Dec 2024 06:34 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Tue, 31 Dec 2024 06:34 PM IST
सार

1 जनवरी की रात को जहरीले कचरे को भेजा जा सकता है। 12 कटेंनर एक साथ चलेेंगे और उनकी स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। उधर पीथमपुर में कचरा जलाने का लगातार विरोध हो रहा हैै।

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Indore: UCC waste will not be burnt at once in Pithampur, will be disposed of slowly for six months, platform
पीथमपुर में होगा विषैले कचरे का निपटान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से विषैला कचरा 12 कंटेनरों में लोड हो गया है। 3 जनवरी से पहले कचरा इंदौर होते हुए पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रामकी के संयंत्र में ले लाया जाएगा। पीथमपुर में भी इसके लिए तैयारियां की गई हैं। जिस जगह कचरा 337 टन कचरा रखा जाएगा। वहां जमीन से उपर लकड़ी का बड़ा प्लेटफार्म बनाया गया है, क्योंकि कचरा एक साथ नहीं जलाया जाएगा। छह माह के भीतर 337 टन कचरे का निपटान होगा। कचरा भस्मक में भी फिल्टर लगाए गए हैं, ताकि धुआं वातावरण को कम दूषित करे। रामकी फैक्टरी के आसपास बैरिकेड लगा दिए गए हैं।

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यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन कचरा इंदौर के समीप पीथमपुर में लाने की तैयार पूरी हो गई है। कचरा रात के समय ग्रीन काॅरिडोर तैयार कर लाया जाएगा। 31 दिसंबर को देर रात तक नववर्ष के स्वागत की पार्टियां रहती हैं और पुलिस सड़कों पर इंतजाम में लगी रहती है। इस कारण माना जा रहा है कि 1 जनवरी की रात इन कंटेनरों को पीथमपुर भेजा जा सकता है। 12 कटेंनर एक साथ चलेंगे और उनकी स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
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सभी पक्ष पुनर्विचार करें : भार्गव
पीथमपुर में कचरा जलाने का लगातार विरोध हो रहा है। इंदौर के मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने भी मंगलवार को कहा कि पीथमपुर में यह कचरा जलाने पर पुनर्विचार होना चाहिए। हाईकोर्ट में मामला चल रहा है, वहां भी इस बारे में गुहार लगाई जा सकती है। इंदौर व आसपास के क्षेत्रों में इसके असर को लेकर चिंता जताई गई है, इसलिए इस फैसले पर शासन व संबंधित पक्षों को पुनर्विचार करना चाहिए।
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जंतर मंतर पर करेंगे प्रदर्शन 
उधर, पीथमपुुर के लोग दिल्ली के जंतर-मतंर पर प्रदर्शन की घोषणा कर चुके हैं। इंदौर में भी मेडिकल काॅलेज के पूर्व छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। याचिका में कहा गया कि पीथमपुर में कचरे के निपटान का असर इंदौर जैसे शहर पर पड़ेगा। कचरा भस्मक लैंडफील स्थल के समीप का नाला इंदौर की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में आकर मिलता है। विषैले कचरे के कारण नाले का पानी प्रदूषित हो चुका है।

पहले भी जला चुके कचरा : शासन
उधर, शासन का कहना है कि 10 टन कचरा पहले पीथमपुर में जलाया जा चुका है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही हाईकोर्ट ने 337 टन कचरे के निपटान की समयसीमा तय की है। छह जनवरी को इस मामले में सुनवाई है। तीन जनवरी को जवाब प्रस्तुत करने से पहले कचरा पीथमपुर में हर हाल में कचरा भेजा जाएगा।

 
चाय पत्ती की फैक्टरी का बोलकर बनाया रामकी प्लांट
पीथमपुर के लोगों ने 20 साल पहले भी रामकी के प्लांट का विरोध किया था। तब ग्रामीणों को कहा गया था कि चाय पत्ती की फैक्टरी लगाई जाएगी, लेकिन बाद में वहां कचरा भस्मक की स्थापना की गई। इस प्लांट में वर्षभर औद्योगिक कचरा रात के समय जलाया जाता है, जबकि संयंत्र के आसपास बसाहट भी है। 
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