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Dhar Bhojshala Survey: भोजशाला का सर्वे आज से, खुदाई के लिए धार पहुंची टीम; जुमे की नमाज नहीं होगी प्रभावित

Fri, 22 Mar 2024 06:02 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Fri, 22 Mar 2024 06:02 AM IST
सार

भोजशाला का इतिहास एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। हिन्दू संगठनों के अनुसार भोजशाला धार के राजा भोज ने बनाई थी। सरस्वती सदन के रुप में भोजशाला शिक्षा का बड़ा केंद्र थी। राजवंश काल में यहां सूफी संत कमाल मौलाना की दरगाह बन गई।

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Indore: Survey of Dhar Bhojshala from Friday, team reached Dhar for excavation.
धार भोजशाला। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) आज से मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थिति भोजशाला का सर्वेक्षण शुरू करेगा। भोजशाला का सच क्या हैै। यह जानने के लिए एएसआई का दल धार पहुंच गया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर भोजशाला के सर्वे के लिए आज से खोदाई शुरू होगी। भोजशाला मामले में इंदौर में लगी याचिका पर सुनवाई के बाद फरवरी माह में सर्वे के आदेश दिए थे।

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कई वर्षों से भोजशाला को लेकर विवाद है। उस पर हिन्दू और मुस्लिम अपना हक जताते हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यहां सरस्वती मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष भोजशाला को इबादतगाह बताता है। विशेषज्ञों की टीम खुदाई कर यह देखेगी कि भोजशाला का जब निर्माण हुआ था, तब उसकी बनावट किस शैली की है और पत्थरों पर किस तरह के चिन्ह अंकित है। टीम अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपेगी। जिसके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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भोजशाला में भारतीय वास्तुकला और हिन्दू चिन्ह
आर्कियोलाॅजिक्ल सर्वे ऑफ इंडिया ने भी कहा है कि 1902 में भी सर्वे हुआ था। उस सर्वे की जानकारी अफसरों ने कोर्ट के समक्ष रखी। पूर्व में हुए सर्वे में पाया गया था कि भोजशाला की वास्तुकला भारतीय शैली की है। भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए हैं। विष्णु प्रतिमा भी है। उसके प्रमाण याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पेश किए हैं। याचिका में कहा गया है कि भोजशाला में हिंदू समाज को नियमित पूजा का अधिकार है। वहां मुस्लिम समाज नमाज पढ़ता है। नमाज पढ़ने पर रोक लगाना चाहिए, क्योकि वहां हिन्दू मंदिर है।
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राजाभोज ने बनाया था सरस्वती सदन
भोजशाला का इतिहास एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। हिन्दू संगठनों के अनुसार भोजशाला धार के राजा भोज ने बनाई थी। सरस्वती सदन के रूप में भोजशाला शिक्षा का बड़ा केंद्र थी। राजवंश काल में यहां सूफी संत कमाल मौलाना की दरगाह बन गई। मुस्लिम समाज यहां नमाज पढ़ने लगा।

इसके बाद यह दावा किया जाने लगा कि धार में भोजशाला नहीं, बल्कि दरगाह है। अंग्रेजों के शासनकाल में भी भोजशाला को लेकर विवाद उठा था। तब वर्ष 1902 में लाॅर्ड कर्जन धार, मांडू के दौरे पर आए थे। उन्होंने भोजशाला के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये खर्च करने की मंजूरी दी थी। तब सर्वे भी किया गया था। 1951 को धार भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। तब हुए नोटिफिकेशन में भोजशाला और कमाल मौला की मस्जिद का उल्लेख है।


नमाज नहीं होगी प्रभावित
इधर शुक्रवार से सर्वे शुरूहोने के बीच अटकलें लग रही थीं कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर इसका असर होगा। इसे लेकर धार एसपी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि धार की भोजशाला में कल से सर्वे होगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हाई कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। चूंकि कल शुक्रवार है और भोजशाला में नमाज भी होगी। वह प्रभावित नहीं होगी। 

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