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Indore: यूका का कचरा जलाने से रोकने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, कहा- विशेषज्ञों की निगरानी में जल रहा
Thu, 05 Jun 2025 07:41 AM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Thu, 05 Jun 2025 07:41 AM IST
सार
कचरे का पहला ट्रायल दो माह पहले किया गया था। 30 टन कचरा कचरा जलाकर देखा गया। उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। गांव के कुछ स्थानों पर गैस का पता लगाने के लिए उपकरण भी लगाए गए है।
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पीथमपुर में जलाया जा रहा कचरा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पीथमपुर के तारपुरा गांव में जलाए जा रहे यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलने से रोकने की यचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कचरा विशेषज्ञों की निगरानी में जल रहा है और कोर्ट पूरे मामले पर निगरानी बनाए हुए है। इस कारण तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
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यह याचिका इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्रा ने लगाई थी। याचिका में कहा गया कि कचरा जलाने के लिए हाईकोर्ट ने 72 दिन की समय सीमा तय की थी, जो 8 जून को समाप्त हो रही है। इस कारण तत्काल सुनवाई जरूरी है। इस पर न्यायमूर्ति संजय कौल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसकी निगरानी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और विशेषज्ञों की देखरेख में पहले से ही की जा रही है।
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एनजीओ व सामाजिक कार्यकर्ता प्रक्रिया को बाधित कर रहे
पीठ ने इस दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस जहरीले कचरे को हटाने के लिए हम वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन तथाकथित एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ता इस प्रक्रिया को लगातार बाधित करते आ रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने कचरा जलाने की अनुमति 72 दिनों के लिए दी थी, जिसकी समयसीमा 8 जून 2025 को समाप्त हो रही है। ऐसे में कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके।
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याचिकाकर्ता की ओर से अशोक कुमार वासुदेवन ने कहा कि पीथमपुर में कचरा जलाने की प्रक्रिया पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को सुनने के बाद कहा कि चूंकि, यह मामला तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित पर्यावरण एजेंसियों की निगरानी में चल रहा है, अतः इस स्तर पर कोर्ट की तत्काल दखल की जरूरत नहीं है।
1984 गैस त्रासदी का है यह कचरा
बता दें कि 1984 में भोपाल में हुई यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी के बाद बचे रासायनिक कचरे का निपटारा दशकों से लंबित था। इस कचरे को पीथमपुर स्थित रामकी कंपनी के इंसिनरेटर में जलाया जा रहा है। कचरा जलाने का पहला ट्रायल दो माह पहले किया गया था। तब 30 टन कचरा कचरा जलाकर देखा गया। उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। संयंत्र व गांव के कुछ स्थानों पर गैस का पता लगाने के लिए उपकरण भी लगाए गए हैं। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि कचरा जलाने से वातावरण में कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उधर, समय-समय पर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
बता दें, इस कचरे के निपटान के लिए केंद्र सरकार ने रामकी कंपनी को 126 करोड़ रुपये दिए हैं। 12 कंटेनरों में यह कचरा भोपाल से इसी साल जनवरी माह में इंदौर के समीप पीथमपुर लाया गया था। इसका काफी विरोध भी ग्रामीणों ने किया था।
