Indore:नर्मदा जल परियोजना पर बिजली का बोझ होगा कम, जानें कैसे इंदौर नगर निगम बचाएगा हर माह करोड़
इंदौर में नर्मदा जल परियोजना की बढ़ती बिजली लागत को कम करने के लिए नगर निगम ने जलूद की बंजर जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित किया है। 60 मेगावाट का सोलर प्लांट अब हर महीने करोड़ों रुपये की बचत करेगा और शहर की जल आपूर्ति को अधिक किफायती बनाएगा।
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नर्मदा नदी का पानी लगभग 70 किलोमीटर दूर पहाड़ों को पार कर इंदौर तक पहुंचाने में इंदौर नगर निगम को हर महीने करीब 24 करोड़ रुपये बिजली पर खर्च करने पड़ते हैं। अब इस खर्च में हर माह करीब 5 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। नर्मदा किनारे स्थापित सोलर प्लांट खुद बड़ी मात्रा में रोजाना बिजली बनाएगा। इस प्लांट का लोकार्पण बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव शाम साढ़े पाँच बजे जलूद पहुंचे और इस प्लांट का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इंदौर को अहिल्या माता का आशीर्वाद सूर्यनारायण देवता के जरिए मिल रहा है। अहिल्या माता ने इंदौर व महेश्वर में बैठकर देशभर के देवस्थानों को जगमग किया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम हर माह सोलर प्लांट के जरिए जो पैसा बचाएगा, वह शहर के विकास पर खर्च होगा। इस प्रोजेक्ट में जनता भी भागीदार बनी है। उन्होंने ग्रीन बॉन्ड खरीदे। इस तरह के प्रयोग दूसरे नगर निगमों को भी करना चाहिए।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जलूद का इंदौर पर कर्ज है। आज इंदौर जो कुछ भी है, वह जलूद की वजह से है। यहां से नर्मदा के तीन चरण इंदौर पहुंचे हैं। अब जलूद सोलर ऊर्जा के मामले में भी आगे है। हर साल जलूद से इंदौर तक पानी पहुंचाने में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इस खर्च को कम करने के लिए हमने 300 करोड़ की लागत से सोलर प्लांट बनाया है।सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि पूरे देश में ग्रीन एनर्जी को लेकर काम हो रहा है और इसमें इंदौर ने भी अपना योगदान इस सोलर प्लांट के रूप में दिया है।
ग्रीन बॉन्ड से तैयार हुआ बड़ा सोलर प्रोजेक्ट
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि दो साल पहले नगर निगम ने 244 करोड़ रुपये का ग्रीन बॉन्ड जारी किया था। इसी राशि से इस सोलर प्लांट का निर्माण किया गया है। यह देश के किसी भी शहरी निकाय द्वारा लगाए गए बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में शामिल है।
210 एकड़ में फैला, 60 मेगावाट क्षमता का प्लांट
यह सोलर प्लांट 210 एकड़ जमीन पर बनाया गया है, जिसमें ज्यादातर बंजर भूमि का उपयोग किया गया है। प्लांट की क्षमता 60 मेगावाट है और इसके लिए 132 केवी का सब-स्टेशन भी तैयार किया गया है। इससे हर साल करीब 9.6 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।
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नर्मदा जल परियोजना को मिलेगी सीधी बिजली
इस प्लांट से बनने वाली बिजली का इस्तेमाल नर्मदा का पानी इंदौर तक लाने में किया जाएगा। इससे बिजली खर्च में बड़ी कमी आएगी और नगर निगम को आर्थिक राहत मिलेगी।
5 से 7 साल में लागत होगी पूरी वसूल
यह सोलर प्लांट 25 साल के लिए डिजाइन किया गया है। अनुमान है कि इसकी लागत 5 से 7 साल में ही पूरी तरह वसूल हो जाएगी। प्लांट का निर्माण करीब तीन महीने पहले ही पूरा हो चुका था।
लोकार्पण के बाद शुरू होगा बिजली उत्पादन
हाल ही में भोपाल में मेयर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर प्लांट के लोकार्पण के लिए समय मांगा था। अब बुधवार को इसका उद्घाटन हुआ और अगले महीने से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। नगर निगम ने नर्मदा परियोजना के चौथे चरण पर भी काम शुरू कर दिया है। इससे आने वाले तीन साल में शहर को अतिरिक्त पानी की आपूर्ति मिलने लगेगी।
