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Indore News: वकीलों की हड़ताल से अदालतें ठप, सरकार के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा
Fri, 21 Feb 2025 05:31 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 21 Feb 2025 05:31 PM IST
सार
Indore News: दिल्ली बार एसोसिएशन के वकीलों ने प्रस्तावित वकील संशोधन बिल 2025 के खिलाफ अदालतों का बहिष्कार किया। वकीलों का आरोप है कि यह बिल उनके संवैधानिक अधिकारों को कम करने की साजिश है।
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वकील हड़ताल पर गए
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के वकीलों ने शुक्रवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। वकीलों की यह हड़ताल प्रस्तावित वकील संशोधन विधेयक 2025 में किए जाने वाले परिवर्तनों के विरोध में की गई। इंदौर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल बिरथरे ने बताया कि विधेयक में प्रस्तावित संशोधन वकीलों के हितों को नुकसान पहुंचाएंगे।
इस विधेयक में अधिवक्ताओं को अदालतों के कामकाज का बहिष्कार करने या उससे दूर रहने से रोकने का प्रावधान किया गया है। इस हड़ताल का आयोजन जिला बार एसोसिएशन की समन्वय समिति ने किया, जो केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का विरोध कर रही है।
देशभर में हो रहा है विरोध प्रदर्शन
वकीलों का कहना है कि इस विधेयक के माध्यम से उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। इस बिल के प्रस्तावित संशोधनों में वकीलों की स्वतंत्रता और संगठन के अधिकारों को कम करने की कोशिश की जा रही है। अधिवक्ताओं का मानना है कि इस एक्ट में किए जाने वाले संशोधन उनके अधिकारों को दबाने का एक प्रयास हैं। इस विरोध में न केवल इंदौर बल्कि पूरे भारत के वकील एकजुट हो गए हैं।
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वकीलों की हड़ताल भी प्रतिबंधित हो जाएगी
इस विधेयक में सबसे विवादास्पद धारा 35A है, जिसके तहत यह कहा गया है कि कोई भी अधिवक्ता संघ या उसका कोई सदस्य, व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से, अदालत के कार्य का बहिष्कार करने या उससे दूर रहने का आह्वान नहीं कर सकता। साथ ही, अदालत के कामकाज में बाधा डालने या अदालत परिसर में कोई अवरोध उत्पन्न करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रावधान के तहत वकीलों की हड़ताल और बहिष्कार को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा रहा है, जबकि यह पारंपरिक रूप से उनकी मांगों को उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।
सरकार के खिलाफ तेज होगा विरोध प्रदर्शन
इंदौर के वकीलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। इस प्रस्तावित बिल के खिलाफ विरोध जताते हुए वकीलों ने कहा कि यह बार की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। वकीलों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को लेकर उनके संगठनों से संवाद नहीं करती है और उन्हें विश्वास में नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है।
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इस विधेयक में अधिवक्ताओं को अदालतों के कामकाज का बहिष्कार करने या उससे दूर रहने से रोकने का प्रावधान किया गया है। इस हड़ताल का आयोजन जिला बार एसोसिएशन की समन्वय समिति ने किया, जो केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का विरोध कर रही है।
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देशभर में हो रहा है विरोध प्रदर्शन
वकीलों का कहना है कि इस विधेयक के माध्यम से उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। इस बिल के प्रस्तावित संशोधनों में वकीलों की स्वतंत्रता और संगठन के अधिकारों को कम करने की कोशिश की जा रही है। अधिवक्ताओं का मानना है कि इस एक्ट में किए जाने वाले संशोधन उनके अधिकारों को दबाने का एक प्रयास हैं। इस विरोध में न केवल इंदौर बल्कि पूरे भारत के वकील एकजुट हो गए हैं।
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वकीलों की हड़ताल भी प्रतिबंधित हो जाएगी
इस विधेयक में सबसे विवादास्पद धारा 35A है, जिसके तहत यह कहा गया है कि कोई भी अधिवक्ता संघ या उसका कोई सदस्य, व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से, अदालत के कार्य का बहिष्कार करने या उससे दूर रहने का आह्वान नहीं कर सकता। साथ ही, अदालत के कामकाज में बाधा डालने या अदालत परिसर में कोई अवरोध उत्पन्न करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रावधान के तहत वकीलों की हड़ताल और बहिष्कार को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा रहा है, जबकि यह पारंपरिक रूप से उनकी मांगों को उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।
सरकार के खिलाफ तेज होगा विरोध प्रदर्शन
इंदौर के वकीलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। इस प्रस्तावित बिल के खिलाफ विरोध जताते हुए वकीलों ने कहा कि यह बार की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। वकीलों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को लेकर उनके संगठनों से संवाद नहीं करती है और उन्हें विश्वास में नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है।
