{"_id":"6884f5503ecf66f63402e568","slug":"indore-news-indian-doctors-performed-2-complex-surgeries-with-indigenous-robotic-technology-from-france-2025-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore: हिंदुस्तानी डॉक्टरों ने फ्रांस से 8000 किमी दूर की दो जटिल सर्जरी, स्वदेशी रोबोटिक तकनीक ने रचा इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore: हिंदुस्तानी डॉक्टरों ने फ्रांस से 8000 किमी दूर की दो जटिल सर्जरी, स्वदेशी रोबोटिक तकनीक ने रचा इतिहास
Sat, 26 Jul 2025 09:03 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 26 Jul 2025 09:03 PM IST
सार
Indore News: डॉ. मोहित भंडारी ने इस उपलब्धि को सर्जिकल विज्ञान में एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एसएसआई मंत्रा सिस्टम का उपयोग कर एक जटिल गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी को अंतरमहाद्वीपीय स्तर पर करना भारत में चिकित्सा नवाचार की ताकत को दर्शाता है।
विज्ञापन
हिंदुस्तानी डॉक्टरों ने फ्रांस से इंदौर में की दो जटिल सर्जरी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI Image- Freepik
विस्तार
भारतीय सर्जनों ने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में एक सम्मेलन में भाग लेते हुए, लगभग 8000 किलोमीटर दूर इंदौर में दो मरीजों की जटिल सर्जरी कर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि स्वदेशी एसएसआई मंत्रा सर्जिकल रोबोटिक सिस्टम के उपयोग से हासिल की गई, जिसने क्रॉस-कॉन्टिनेंटल रोबोटिक टेलीसर्जरी की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया। इन सर्जरी में एक गैस्ट्रिक बाईपास और एक हृदय संबंधी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) क्लोजर शामिल था, जो स्ट्रासबर्ग में आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी के वार्षिक सम्मेलन के दौरान किए गए।
विज्ञापन
स्ट्रासबर्ग से इंदौर तक सर्जरी
16 से 20 जुलाई तक स्ट्रासबर्ग में आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी के सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, सर्जनों और मेडटेक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पहली सर्जरी, एक गैस्ट्रिक बाईपास, 19 जुलाई को इंदौर के मोहक बेरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स के संस्थापक और आईआरसीएडी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोहित भंडारी ने की। यह सर्जरी स्ट्रासबर्ग से रिमोटली केवल 44 मिनट में बिना किसी जटिलता के पूरी की गई।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- Narsinghpur News: तेज रफ्तार कंटेनर की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों की मौत, एक का सिर धड़ से अलग; दो घायल
विज्ञापन
दूसरी सर्जरी, हृदय में जन्मजात दोष एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) का रोबोटिक क्लोजर, एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल के संस्थापक-अध्यक्ष और सीईओ डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने स्ट्रासबर्ग से की, जबकि मरीज इंदौर में था। इस सर्जरी को यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो मेडिसिन के रोबोटिक सर्जरी निदेशक और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर मिनिमली इनवेसिव कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के अध्यक्ष डॉ. हुसम एच. बाल्खी ने लाइव मॉडरेट किया।
इंदौर में समन्वय और तकनीकी सहायता
दोनों सर्जरी स्ट्रासबर्ग में इंस्टीट्यूट डे रीशेर्श कॉन्ट्रे लेस कैंसर्स डे ल’अपैरियल डायजेस्टिव (आईआरसीएडी) मुख्यालय से रिमोटली इंदौर के श्री औरोबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसएआईएमएस) और आईआरसीएडी नेशनल सेंटर में की गईं। इंदौर में मरीजों के पास मौजूद सहायता टीम ने ऑपरेशन के दौरान समन्वय बनाए रखा। इस टीम का नेतृत्व जयपुर के मणिपाल हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी प्रमुख डॉ. ललित मलिक, एसएआईएमएस के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राम कृष्ण शुक्ला और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. बिपिन आर्य ने किया। एसएस इनोवेशंस और एसएआईएमएस की तकनीकी टीमों ने रियल-टाइम प्रतिक्रिया और सुरक्षा सुनिश्चित की, जिसने इन जटिल सर्जरी को सफल बनाया।
रोबोटिक टेलीसर्जरी का महत्व
इस घटना ने क्रॉस-कॉन्टिनेंटल सर्जिकल सहयोग की व्यवहार्यता को प्रदर्शित किया। डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि रोबोटिक टेलीसर्जरी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच की पुरानी चुनौतियों का समाधान है। यह तकनीक यात्रा की आवश्यकता को समाप्त करती है और विशेषज्ञों की सेवाओं को रिमोटली उपलब्ध कराती है, खासकर दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों के मरीजों के लिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सर्जरी की लागत पारंपरिक सर्जरी के समान है, जो 80,000 से 3.5 लाख रुपये तक हो सकती है, जो अस्पताल, सर्जरी की जटिलता और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। यह तकनीक न केवल तकनीकी रूप से व्यवहार्य है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सुलभ है।
यह भी पढ़ें- MP News: ‘2028 तक लाड़ली बहनों को मिलेंगे 3000 रुपये महीना’, सतना में सीएम मोहन यादव ने दोहराया
स्वदेशी तकनीक की जीत
डॉ. मोहित भंडारी ने इस उपलब्धि को सर्जिकल विज्ञान में एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एसएसआई मंत्रा सिस्टम का उपयोग कर एक जटिल गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी को अंतरमहाद्वीपीय स्तर पर करना भारत में चिकित्सा नवाचार की ताकत को दर्शाता है। वैश्विक मेडटेक दिग्गजों के बीच इस सम्मेलन में स्वदेशी तकनीक से ऐसी जटिल सर्जरी का प्रदर्शन भारत की बढ़ती नवाचार क्षमता और वैश्विक सहयोग को रेखांकित करता है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक एसएसआई मंत्रा सिस्टम से 35 टेलीसर्जरी, जिनमें 10 कार्डियक मामले शामिल हैं और 250 से अधिक कार्डियक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी की गई हैं।
भारत में रोबोटिक सर्जरी का भविष्य
एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल भारत में टेली-प्रॉक्टरिंग और टेलीसर्जरी के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) से नियामक मंजूरी प्राप्त करने वाली एकमात्र सर्जिकल रोबोटिक्स कंपनी है। इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाया है। डॉ. श्रीवास्तव ने इस सफलता के लिए डॉ. विपुल पटेल, डॉ. मोहित भंडारी, आईआरसीएडी इंडिया और एसएस इनोवेशंस की टीम को धन्यवाद दिया।
