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Indore News: निर्भया कांड से भी किसी ने सबक नहीं सीखा, नाबालिग अपराधियों पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

Mon, 16 Sep 2024 09:53 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Mon, 16 Sep 2024 09:53 PM IST
सार

दुष्कर्म के केस में हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा बरकरार रखी, चार साल की मासूम को बनाया था शिकार, सजा से पहले ही जेल से भाग भी गया। 
 

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मुंबई में कोर्ट ने महिला ड्रग तस्कर को जमानत देने से किया मना - फोटो : ANI

विस्तार

निर्भया कांड की भयावहता से भी किसी ने कोई सबक नहीं सीखा। बहुत दुखद बात है कि देश में किशोरों के साथ बहुत नरम व्यवहार किया जा रहा है। मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाला दुष्कर्मी फरार है। शायद वह सड़क के किसी अंधेरे कोने में एक और शिकार की तलाश में छुपा हुआ है। उसे रोकने वाला कोई नहीं है। कठोरतम कानून को लेकर बार-बार आवाज उठती रही है, निराशा की बात है कि निर्भया कांड के बावजूद इसे लेकर कुछ नहीं हुआ। इस तल्ख टिप्पणी के साथ मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने चार वर्षीय मासूम से दुष्कर्म करने वाले दुष्कर्मी की सजा के खिलाफ दायर अपील निरस्त कर दी। 
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सजा पूरी होने से पहले ही भाग गया था आरोपी
कोर्ट ने नाबालिग अपराधियों के मामले में देश में नरम कानून को लेकर अफसोस जताया है। 29 दिसंबर 2017 को वारदात के दिन दुष्कर्मी की आयु 17 वर्ष 3 माह 27 दिन थी। विचारण न्यायालय ने 8 मई 2019 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए दुष्कर्मी को 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए सुधारगृह भेज दिया था। उसे 21 वर्ष तक की आयु पूरी करने तक वहां रखने और इसके बाद जेल शिफ्ट किया जाना था, लेकिन 13 नवंबर 2019 को ही वह सुधारगृह से भाग गया। उसने जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। इस अपील को निरस्त करते हुए न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि यह टिप्पणी करते हुए दुख हो रहा है कि इस देश में नाबालिग अपराधियों के साथ बहुत नरमी बरती जा रही है। यह पीड़ितों का दुर्भाग्य है कि निर्भया कांड की भयावहता से भी किसी ने कोई सबक नहीं सीखा।
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जिला न्यायालय का फैसला सही
दुष्कर्मी ने यह कहते हुए जिला न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी कि किराए के विवाद के कारण मामला गढ़ा गया है, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की मां खुद घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंची थीं। वहां उन्होंने चार वर्षीय बेटी को बेहोश पाया था। उसके गुप्तांगों से रक्त बह रहा था। दुष्कर्मी पीड़िता के पास खड़ा था। ऐसी स्थिति में दुष्कर्मी के खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कराने और असली आरोपित को बचाने का कोई कारण नहीं है।
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