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Indore News: पानी की बर्बादी करने वाले सावधान, हाई कोर्ट ने सरकार को दिया 4 हफ्ते का समय
Fri, 13 Feb 2026 05:52 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 13 Feb 2026 05:52 PM IST
सार
Indore News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में गहराते जल संकट पर चिंता जताते हुए सरकार को पूरे प्रदेश के लिए एक व्यापक जल संरक्षण नीति बनाने का निर्देश दिया है।
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इंदौर हाईकोर्ट मे लगी याचिका
विस्तार
इंदौर हाई कोर्ट ने बड़वानी जिले के सुदूर क्षेत्रों में गहराते जल संकट को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। माननीय न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि पानी की समस्या का समाधान केवल तात्कालिक उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि न केवल इंदौर संभाग, बल्कि संपूर्ण मध्य प्रदेश के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और उनके पुनरुद्धार के लिए एक व्यापक और ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। प्रशासन को उन सभी कुओं, तालाबों और प्राचीन बावड़ियों को चिन्हित करने को कहा गया है जो वर्तमान में सूख चुके हैं या उपेक्षा के कारण जर्जर अवस्था में हैं। इन जल निकायों को फिर से जीवित करने के लिए प्रभावी प्लानिंग की आवश्यकता पर बल दिया गया है और सरकार को इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
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जल संकट अब एक गंभीर समस्या बन गया
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जल संकट अब एक स्थानीय मुद्दा न रहकर एक गंभीर राज्यव्यापी समस्या बन चुका है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इसे राज्य की प्रमुख नीतियों का हिस्सा बनाया जाना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के वकील मनीष विजयवर्गीय ने दलील दी कि निमाड़ और मालवा जैसे क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव समय से पहले ही दिखने लगा है। बारिश के जल पर निर्भर रहने वाले पारंपरिक पोखर, कुंड और बावड़ियां तेजी से सूख रहे हैं, जिससे विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट विकराल रूप ले सकता है।
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पिपलांत्री मॉडल को अपनाने पर विचार
मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता की ओर से राजस्थान के प्रसिद्ध पिपलांत्री गांव के सफल जल संरक्षण मॉडल का उदाहरण पेश किया गया। कोर्ट को बताया गया कि कैसे जनसहभागिता के माध्यम से एक पथरीले और बंजर इलाके को जल-समृद्ध और हरित क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने हाल ही में वहां का दौरा कर श्यामसुंदर पालीवाल से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर एक अध्ययन रिपोर्ट भी साझा की है। हाई कोर्ट ने सरकार को इस रिपोर्ट का गंभीरता से अवलोकन करने का निर्देश दिया है ताकि इस मॉडल की संभावनाओं को मध्य प्रदेश में भी तलाशा जा सके। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जलस्रोतों को बचाना हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब मार्च के मध्य में निर्धारित की गई है।
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जल संकट अब एक गंभीर समस्या बन गया
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जल संकट अब एक स्थानीय मुद्दा न रहकर एक गंभीर राज्यव्यापी समस्या बन चुका है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इसे राज्य की प्रमुख नीतियों का हिस्सा बनाया जाना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता के वकील मनीष विजयवर्गीय ने दलील दी कि निमाड़ और मालवा जैसे क्षेत्रों में गर्मी का प्रभाव समय से पहले ही दिखने लगा है। बारिश के जल पर निर्भर रहने वाले पारंपरिक पोखर, कुंड और बावड़ियां तेजी से सूख रहे हैं, जिससे विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट विकराल रूप ले सकता है।
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पिपलांत्री मॉडल को अपनाने पर विचार
मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता की ओर से राजस्थान के प्रसिद्ध पिपलांत्री गांव के सफल जल संरक्षण मॉडल का उदाहरण पेश किया गया। कोर्ट को बताया गया कि कैसे जनसहभागिता के माध्यम से एक पथरीले और बंजर इलाके को जल-समृद्ध और हरित क्षेत्र में तब्दील कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने हाल ही में वहां का दौरा कर श्यामसुंदर पालीवाल से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर एक अध्ययन रिपोर्ट भी साझा की है। हाई कोर्ट ने सरकार को इस रिपोर्ट का गंभीरता से अवलोकन करने का निर्देश दिया है ताकि इस मॉडल की संभावनाओं को मध्य प्रदेश में भी तलाशा जा सके। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जलस्रोतों को बचाना हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब मार्च के मध्य में निर्धारित की गई है।
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