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Indore: इंदौर में नर्मदा के तीन चरणों के बावजूद जलसंकट, टैंकरों के भरोसे शहर

Thu, 01 May 2025 01:23 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Thu, 01 May 2025 01:23 PM IST
सार

नगर निगम ने टैंकर से जल वितरण करने के लिए 400 टैंकर किराए पर ले रखे है। इसके अलावा 50 टैंकर नगर निगम के खुद के है। शहर के 85 वार्डों में सुबह शाम टैंकरों से पानी बांटा जा रहा है। यह टैंकर भी नर्मदा की टंकियों से ही पानी ले रहे है। 

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Indore: Despite three phases of Narmada, there is water crisis in Indore, city is dependent on tankers
इंदौर में जलसंकट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर में गर्मी के तीखे तेवर के साथ जलसंकट भी लोगों की चिंता की वजह बन चुका है। नलों में पानी की धार कम  है और बोरिंगों ने भी कम दबाव से पानी देना शुरू कर दिया है। शहर के ज्यादातर हिस्से टैंकरों के भरोसे है। निजी टैंकरों से पानी की पूर्ति करने में मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट भी गड़बड़ा रहा है।

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इंदौर में नर्मदा के तीन चरणों से साढ़े चार सौ एमएलडी से ज्यादा पानी आता है। इसके बावजूद मई माह आते ही शहर में जलसंकट गहराने लगा है। शहर की चालीस से ज्यादा टंकियां भी कम मात्रा में भर पा रही है। इस कारण नल भी कम देर के लिए आ रहे है।

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शहर में दौड़ रहे 450 टैंकर

नगर निगम ने टैंकर से जल वितरण करने के लिए 400 टैंकर किराए पर ले रखे है। इसके अलावा 50 टैंकर नगर निगम के खुद के है। शहर के 85 वार्डों में सुबह शाम टैंकरों से पानी बांटा जा रहा है। बस्तियों में छोटे टैंकरों से पानी लिया जा रहा है। यह टैंकर भी नर्मदा की टंकियों से ही पानी ले रहे है। इस कारण जब सुबह वाटर सप्लाई होती है तो घरों तक नलों से भी पानी कम पहुंच रहा है। हर वार्ड में दो से लेकर पांच टैंकर पार्षदों को जल वितरण के लिए दिए गए है। जो वार्ड क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़े है। उन्हें ज्यादा टैंकर दिए गए है।

यह है जलसकंट की वजह

-इंदौर में एक अनुमान के अनुसार दो लाख से ज्यादा निजी बोरिंग है। वर्षभर तो बोरिंगों से पानी की पूर्ति हो जाती है, लेकिन जब बोरिंगों का पानी कम होने लगता है या वे सूख जाते है तो फिर नगर निगम पर पानी की डिमांड बढ़ने लगती है।

-शहर में हर दिन 30 एमएलडी पानी यशवंत सागर से लिया जाता है, लेकिन गर्मी के समय तालाब का जलस्तर भी कम हो जाता है। इस कारण पश्चिमी क्षेत्र में भी नर्मदा से जल वितरण किया जाता है। इस कारण जलूद से इंदौर तक आने वाले 450 एमएलडी पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है।

- शहर के तालाबों के कारण आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर बढ़ा रहता है। गर्मी में वे तालाब सूख जाते है तो फिर आसपास के क्षेत्रों के बोरिंग भी कम पानी देने लगते है।

-गर्मी में पानी की डिमांड भी बढ़ जाती है। इंदौर में फिलहाल पानी की डिमांड 500 एमएलडी की है, लेकिन उतना पानी नहीं मिल पा रहा है।

वितरण नेटवर्क मजबूत है

शहर में जल वितरण का नेटवर्क मजबूत है। गर्मी में पानी की डिमांड बढ़ जाती है। इस कारण टैंकरों से भी शहर में जल वितरण किया जा रहा है। नर्मदा से पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा है। शहर के ज्यादातर इलाकों में प्रतिदिन नल आ रहे है।-पुष्य मित्र भार्गव, मेयर

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