Indore: कोलकाता से लाए गए बच्चों से सराफा के कारखाने में करवा रहे थे बाल श्रम, छह बच्चों को कराया मुक्त
सराफा क्षेत्र में कारखानों में आभूषण बनाने के काम रात दस बजे से से सुबह दस बजे के बीच होता है। आभूषण बनाने के लिए एसिड का उपयोग भी होता है। बाल श्रमिक जान जोखिम में डालकर एसिड का उपयोग करते थे और आभूषण बना रहे थे।
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इंदौर में सोने चांदी के आभूषण बनाने के लिए कारखाने में नाम मात्र की मजदूरी पर बाल श्रमिकों से कुछ दलाल काम करा रहे थे। महिला व बाल विकास विभाग की टीम ने सराफा के कारखाने में छापा मारकर छह बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। बच्चों को कोलकाता से इंदौर लाया गया था और दलालों ने उनके माता-पिता को इसके एवज में पैसा दिया था। कारखाने रहकर ही बच्चे रात-दिन आभूषण बनाने का काम करते थे।
सराफा के कई कारखानों में बाल श्रमिकों से काम कराने की सूचना बच्चों के लिए काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी फाउंडेश्न को मिली थी। इसके बाद महिला व बाल विकास विभाग के साथ योजना बनाकर छापा मारा गया और छह बच्चों को मुक्त कराया।
रात में कराते थे काम
सराफा क्षेत्र में कारखानों में आभूषण बनाने के काम रात दस बजे से से सुबह दस बजे के बीच होता है। आभूषण बनाने के लिए एसिड का उपयोग भी होता है। बाल श्रमिक जान जोखिम में डालकर एसिड का उपयोग करते थे और आभूषण बना रहे थे। फिलहाल बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया है। अब उन्हें उनके गृह क्षेत्र में भेजा जाएगा। विभाग बच्चों से काम करने वाले कारखाना संचालक के खिलाफ भी एक्शन लेगा।
