{"_id":"6510378ccfba41e38105775a","slug":"holkar-stadium-solar-zero-waste-2023-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore: जीरो वेस्ट होलकर स्टेडियम अब सोलर स्टेडियम बना, खुद के लिए बिजली पैदा करेगा, कार्बन उत्सर्जन कम करेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore: जीरो वेस्ट होलकर स्टेडियम अब सोलर स्टेडियम बना, खुद के लिए बिजली पैदा करेगा, कार्बन उत्सर्जन कम करेगा
Sun, 24 Sep 2023 06:50 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 24 Sep 2023 06:50 PM IST
सार
सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का होलकर स्टेडियम देशभर में आदर्श बना। 376 सोलर पैनल लगे। भारत आस्ट्रेलिया मैच से पहले हुआ उद्घाटन।
विज्ञापन
सोलर पैनल का उद्घाटन करते कप्तान केएल राहुल।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
विस्तार
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का होलकर स्टेडियम खेलों के क्षेत्र में देश में आदर्श है। यह 2015 से जीरो वेस्ट स्टेडियम है। अब इसमें एक और नई उपलब्धि जुड़ गई है। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) ने रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में 376 सौर पैनल स्थापित करके हरित भारत की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। इस पहल से हर साल 277 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। इसका उद्घाटन भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे वनडे से पहले किया गया। उद्घाटन के अवसर पर भारत के कार्यवाहक कप्तान केएल राहुल और एमपीसीए के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
70 से 75 प्रतिशत विद्युत की मांग पूरी करेंगे
स्टेडियम की छत पर 200 केडब्ल्यूपी के सोलर पैनल लगाए गए हैं। नियमानुसार यह प्रस्तावित विद्युत जरूरत का कुछ प्रतिशत उत्पादन करेंगे। ऐसे में होलकर स्टेडियम अपनी दैनिक जरूरत का 70 से 75 प्रतिशत विद्युत उत्पादन करने में सक्षम होगा। देश में बेंगलुरू, मुंबई सहित कुछ ही अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में ऐसी व्यवस्था है, जिनमें से इंदौर एक है। अधिकांश स्टेडियम में टैंटनुमा छत लगाई जाती है, जिससे सोलर पैनल नहीं लग पाते।
गीले कचरे से तैयार होती है खाद, पोस्टर से बनते हैं थैले
एमपीसीए के सचिव संजीव राव कहते हैं कि वर्ष 2015 से स्टेडियम जीरो वेस्ट इवेंट करा रहा है। मैचों के दौरान निकलने वाले गीले कचरे से खाद तैयार होती है। शेष कचरे को छांटते हुए दो हिस्सों (रिसाइकल और रियूस) में बांटा जाता है। यहां अन्य स्टेडियम की तरह मैचों के दौरान फ्लेक्स इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इसके स्थान पर विशेष प्रकार के कपड़े से बने पोस्टर लगाए जाते हैं। मैच के बाद इसके थैले बनाकर बांटे जाते हैं। रिसाइकल हो सकने वाले कचरे का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
वर्षा जल का संग्रह किया, क्षेत्र का जल स्तर सुधरा
होलकर स्टेडियम के मैदान के नीचे करीब 12 कुएं बने हैं। छत और गैलरी सहित वर्षा का पानी मैदान में जाता है और इन कुओं के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। इससे न सिर्फ स्टेडियम बल्कि समीप के पूरे क्षेत्र का जमीनी जलस्तर बढ़ा है। भीषण गर्मी में भी स्टेडियम के बोरिंग साथ नहीं छोड़ते। गत सत्र में एमपीसीए द्वारा कराए सर्वे के अनुसार कुओं की इस व्यवस्था के माध्यम से करीब तीन करोड़ लीटर पानी जमीन में उतरा था। वर्षा जल को संग्रहित करने की ऐसी कवायद कहीं और नजर नहीं आती है।
जीरो वेस्ट इवेंट कराए जाते हैं
खेल के साथ ही समाज के प्रति भी जिम्मेदारी को लेकर हम गंभीर हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए हम नियमित प्रयास कर रहे हैं। यहां पानी को जमीन में उतारने की व्यवस्था के कारण पूरे क्षेत्र में जमीनी जलस्तर बढ़ा है। हमारे यहां बोरिंग सालभर नहीं सूखते। यहां जीरो वेस्ट इवेंट कराए जाते हैं। अब बिजली उत्पादन भी हम करने जा रहे हैं। भविष्य में पर्यावरण से जुड़ी और भी कोई पहल सामने आएंगी, तो मप्र क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) सबसे पहले उसे अपनाएगा।
विज्ञापन
70 से 75 प्रतिशत विद्युत की मांग पूरी करेंगे
स्टेडियम की छत पर 200 केडब्ल्यूपी के सोलर पैनल लगाए गए हैं। नियमानुसार यह प्रस्तावित विद्युत जरूरत का कुछ प्रतिशत उत्पादन करेंगे। ऐसे में होलकर स्टेडियम अपनी दैनिक जरूरत का 70 से 75 प्रतिशत विद्युत उत्पादन करने में सक्षम होगा। देश में बेंगलुरू, मुंबई सहित कुछ ही अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में ऐसी व्यवस्था है, जिनमें से इंदौर एक है। अधिकांश स्टेडियम में टैंटनुमा छत लगाई जाती है, जिससे सोलर पैनल नहीं लग पाते।
विज्ञापन
गीले कचरे से तैयार होती है खाद, पोस्टर से बनते हैं थैले
एमपीसीए के सचिव संजीव राव कहते हैं कि वर्ष 2015 से स्टेडियम जीरो वेस्ट इवेंट करा रहा है। मैचों के दौरान निकलने वाले गीले कचरे से खाद तैयार होती है। शेष कचरे को छांटते हुए दो हिस्सों (रिसाइकल और रियूस) में बांटा जाता है। यहां अन्य स्टेडियम की तरह मैचों के दौरान फ्लेक्स इस्तेमाल नहीं होते, बल्कि इसके स्थान पर विशेष प्रकार के कपड़े से बने पोस्टर लगाए जाते हैं। मैच के बाद इसके थैले बनाकर बांटे जाते हैं। रिसाइकल हो सकने वाले कचरे का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
वर्षा जल का संग्रह किया, क्षेत्र का जल स्तर सुधरा
होलकर स्टेडियम के मैदान के नीचे करीब 12 कुएं बने हैं। छत और गैलरी सहित वर्षा का पानी मैदान में जाता है और इन कुओं के माध्यम से जमीन में उतर जाता है। इससे न सिर्फ स्टेडियम बल्कि समीप के पूरे क्षेत्र का जमीनी जलस्तर बढ़ा है। भीषण गर्मी में भी स्टेडियम के बोरिंग साथ नहीं छोड़ते। गत सत्र में एमपीसीए द्वारा कराए सर्वे के अनुसार कुओं की इस व्यवस्था के माध्यम से करीब तीन करोड़ लीटर पानी जमीन में उतरा था। वर्षा जल को संग्रहित करने की ऐसी कवायद कहीं और नजर नहीं आती है।
जीरो वेस्ट इवेंट कराए जाते हैं
खेल के साथ ही समाज के प्रति भी जिम्मेदारी को लेकर हम गंभीर हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए हम नियमित प्रयास कर रहे हैं। यहां पानी को जमीन में उतारने की व्यवस्था के कारण पूरे क्षेत्र में जमीनी जलस्तर बढ़ा है। हमारे यहां बोरिंग सालभर नहीं सूखते। यहां जीरो वेस्ट इवेंट कराए जाते हैं। अब बिजली उत्पादन भी हम करने जा रहे हैं। भविष्य में पर्यावरण से जुड़ी और भी कोई पहल सामने आएंगी, तो मप्र क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) सबसे पहले उसे अपनाएगा।
