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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Hingot war: Hingot war is played near Indore on the second day of Diwali, know what is the tradition.

Hingot war: दीपावली के दूसरे दिन खेला जाता है इंदौर के समीप हिंगोट युद्ध, जानिए क्या है परंपरा

Thu, 31 Oct 2024 03:15 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Thu, 31 Oct 2024 03:15 PM IST
सार

हिंगोट युद्ध पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है और  सैकड़ों वर्षों से खेला जा रहा है। इस युद्ध में हिंगोट से दोनो सेना के कई योद्धा घायल हो जाते है। इस युद्ध को देखने के लिए हजारों की संख्या में आसपास के गांवों के लोग भी जुटते है।

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Hingot war: Hingot war is played near Indore on the second day of Diwali, know what is the tradition.
हिंगोट युद्ध - फोटो : amar ujala

विस्तार

इंदौर से 35 किलोमीटर देपालपुर में दीपावली के दूसरे दिन हिंगोट युद्ध खेलने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। कलंगी और तुर्रा नाम की सेनाएं आमने सामने होती हैं और उनके हाथों में होते है जलते हुए हिंगोट, जो एक-दूसरे पर फेंके जाते हैं। यह परंपरागत युद्ध शनिवार को भी दोनों सेनाएं खेलेंगी। इसकी तैयारी बीते दस दिनों से जारी है। दोनों सेनाएं बारूद भरकर हिंगोट तैयार कर चुकी हैं।

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शुक्रवार को सिंदूरी शाम होते ही दोनों सेनाअेां के योद्धा खेल भावना का परिचय देते हुए पहले एक दूसरे के गले मिलेंगे और फिर आमने सामने होकर हिंगोट युद्ध लड़ेंगे। यह हिंगोट युद्ध पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है और सैकड़ों वर्षों से खेला जा रहा है। इस युद्ध में हिंगोट से दोनों सेना के कई योद्धा घायल हो जाते हैं। इस युद्ध को देखने के लिए हजारों की संख्या में आसपास के गांवों के लोग भी जुटते हैं।
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दो गांवों के ग्रामीण खेलते हैं युद्ध
हिंगोट युद्ध गौतमपुरा और रुणजी गांव के ग्रामीण खेलते हैं। गौतमपुरा की सेना का नाम तुर्रा होता है और रुणजी गांव की सेना कलंगी कहलाती है। जलते डिंगोट से बचने के लिए योद्धा साफा पहनते हैं और हाथ में ढाल भी रखते हैं। कुछ नौजवान युवक हेलमेट पहनकर भी युद्ध के मैदान में उतरते हैं। पीठ पर बंधे तरकश से हिंगोट निकाले जाते हैं और उसे जलाकर दूसरी सेना की तरफ फेंका जाता है। राकेट जैसे हिंगोट से दूसरी सेना के लोग खुद को बचाते हैं। सूरज के डूबने के बाद जैसे ही अंधेरा होने लगता है। युद्ध को विराम दे दिया जाता है। इसके बाद दोनो सेनाएं फिर एक दूसरे के गले मिलती है। लोग भी एक दूसरे को दीपावली की बधाई देते है और अपने-अपने घर लौट आते हैं।

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