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Indore: 100 साल की दादी के लिए पसीजा पोते का दिल तो मां को छुड़ाने के लिए 12 साल के बेटे ने लड़ी कानूनी लड़ाई

Wed, 28 Sep 2022 09:46 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 28 Sep 2022 09:46 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले की दो अलग-अलग ऐसी घटनाएं बता रहे हैं, जिसे पढ़कर आपका दिल पसीज सकता है। दरअसल, यह कहानी है दादी-पोते, मां-बाप और बेटे की। पहला मामला है 100 साल की दादी के लिए पसीजा पोते का दिल और दूसरा मामला है 12 साल के बेटे ने अपनी मां को पिता की कैद से छुड़ाने के लिए कैसे कानूनी लड़ाई लड़ी।

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Grandson brought home 100 years old grandmother Son fought a legal battle to free his mother
दादी के लिए पसीजा पोते का दिल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इंदौर जिले में 24 सितंबर को 60 साल के बेटे ने 100 की उम्र में अपनी मां को लावारिस छोड़ दिया था। पिता की इस करतूत का वीडियो आने के बाद पोते का दिल पसीजा और वह दादी को अपने घर ले आया है। अब उसकी पत्नी उनकी सेवा करेगी। बुजुर्ग मां के बेटे को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और वह भी मां को लेने वृद्धाश्रम पहुंचा। यहां माफीनामा लिखवाने और बुजुर्ग का अच्छे से ख्याल रखने की शर्त पर परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।

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मैं अपने किए पर शर्मिंदा हूं...
वृद्धाश्रम में मां को देख बेटा बोला, मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं। पोते ने भी पूरे घटनाक्रम पर अफसोस जताया। उसने कहा, दादी सबसे ज्यादा मुझे चाहती है। पिता से हमारे विवाद के कारण मैं चाह कर भी दादी को अपने पास नहीं रख सका। मैं दादी को अपने साथ ले जाऊंगा। मैं, पत्नी और मेरे तीनों बच्चे उनकी सेवा करेंगे।
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बेटे ने मां को लावारिस छोड़ा था...
मालवा मिल निवासी रामेश्वर प्रजापत अपनी नातिन के साथ मां को लावारिस छोड़कर आ गया था। यह वाकया सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया था। इसके बाद एक एनजीओ ने पितृ पर्वत स्थित अपने वृद्धाश्रम में बुजुर्ग को सहारा दिया था। इसके बाद बेटा रामेश्वर मां को लेने वृद्धाश्रम पहुंचा था। वहां उसके द्वारा यह बताने कि मैं समाज में बदनामी के कारण उन्हें लेने आया हूं तो संस्था संचालक यश पाराशर सहमत नहीं हुए। दरअसल, रामेश्वर ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी को लेकर कोई बात नहीं की थी, बल्कि औपचारिकता वश मां ले जाना चाहा था। दूसरी ओर छोटे बेटे ने फोन पर संचालक को पिता के रुखे व्यवहार से अवगत कराया था।
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मां को पिता की कैद से छुड़ाने के लिए बेटे ने लड़ी कानून लड़ाई
इंदौर में एक शख्स ने एक साल से अपनी ही पत्नी को कैद में रखा। अपनी मां को पिता की कैद से आजाद कराने के लिए 12 साल के बेटे ने ही वकील के माध्यम से कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को एक्शन लेने और महिला को कैद से आजाद कराने के आदेश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी की तरफ से मां-बेटे को पांच हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश बुधवार को जारी किए हैं।

आरोपी पिछले एक साल से पत्नी (37) और बेटे (12) को घर में बंद रखता था। दोनों के साथ आए दिन मारपीट करता था। पीड़ित महिला सिलाई का काम कर घर का खर्च चलाती है। लेकिन, पति दिनभर घर पर बाहर से ताला लगाकर चला जाता था। घर पर सिलाई का काम देने आने वालों से विवाद भी करता था। मां-बेटे को गैस सिलेंडर से घर जलाकर जान से मारने की धमकी भी देता था। याचिका में महिला ने पति पर दूसरी महिलाओं से संबंध होने और उनसे मिलने जाने पर बेटे को साथ ले जाने का आरोप भी लगाया। इससे बच्चे के दिमाग पर गलत प्रभाव पड़ रहा था, जिसके कारण वह पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पा रहा था।

ऐसे की वकीलों ने मदद...
जिला कोर्ट के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे और ईश्वर कुमार प्रजापति ने बताया, मार्च 2022 में वह लंच करने अपने साथियों के साथ कोर्ट से बाहर आए थे। जहां बच्चा भटक रहा था और अन्य वकीलों को अपनी बात बताते हुए मदद मांग रहा था। इस दौरान उनकी नजर बच्चे पर पड़ी। पहले उन्होंने आवेदन बनाकर बच्चे को कमिश्नर के पास भेजा। लेकिन पुलिस ने जब कार्रवाई नहीं की तो बच्चा उन्हें ढूंढते हुए कोर्ट आया। 


यहां पर कृष्ण कुमार और ईश्वर प्रजापति ने बच्चे और उसकी मां को न्याय दिलाने की बात कही, जिसके बाद उन्होंने जिला बाल विकास अधिकारी से बात कर कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस मामले में कलेक्टर को भी एक कॉपी सौंपी गई थी। मामले में बच्चे के माध्यम से एक याचिका मजिस्ट्रेट अंकिता त्रिपाठी की कोर्ट में लगाई थी। जहां उसे स्वीकार करते हुए पुलिस को महिला और उसके बेटे को घर में कैद न करते हुए पूरी सुरक्षा देने को निर्देश दिया।


कोर्ट ने आरोपी को अपनी पत्नी और बच्चे को हर महीने पांच हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया। कोर्ट ने आदेश का पालन नहीं करने पर एक साल की सजा और दो हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया है। कोर्ट के आदेश के बाद महिला और उसका बेटा बंधन मुक्त हैं।    

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