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World Cancer Day: 54 की उम्र में थर्ड स्टेज कैंसर हुआ, डॉक्टर बोले- आप नहीं बचेंगी, आज मैं दौड़ लगाती हूं

Sat, 04 Feb 2023 02:38 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Sat, 04 Feb 2023 02:38 PM IST
सार

एक ऐसी कहानी जो आपमें नई ऊर्जा का संचार कर देगी। यह कहानी सिखाती है कि जो जीना चाहते हैं उन्हें कैंसर भी हरा नहीं सकता। 
 

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cancer survivor fighter indore inspirational motivational story
ज्योत्सना तिवारी - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

बेहद सामान्य कद काठी और मधुर व्यवहार। 54 वर्षीय ज्योत्सना तिवारी को देखकर कोई शायद ही मानेगा कि वो एक ऐसी जंग से गुजरी हैं जिसमें मजबूत से मजबूत शख्स भी शायद हार मान जाए। ज्योत्सना तिवारी को जून 2022 में पता चला कि उन्हें थर्ड स्टेज का ओवेरियन कैंसर है। यह तब पता चला जब पेट में पानी भर गया और लिवर ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद जब जांच हुई तो डॉक्टरों ने उन्हें कहा कि आप बस अपनी इच्छाशक्ति से ही इस पर जीत हासिल कर सकती हैं। 
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अमर उजाला से बातचीत में ज्योत्सना तिवारी ने बताया कि इसके बाद मैंने ठान लिया कि यह मेरे जीवन की नई जंग है और मैं ठीक होकर बताऊंगी। कीमोथैरेपी शुरू हुई और इस दौरान मैंने सुना कि कीमोथैरेपी में लोग बहुत कमजोर हो जाते हैं और दिनभर बिस्तर पर पड़े रहते हैं। मैं कीमोथैरेपी में भी दिनभर घर के काम करती थी। परिवार वाले चिंतित रहते थे कि मैं आराम क्यों नहीं करती। उन्होंने डॉक्टर से पूछा तो डॉक्टर बोले अगर उनमें काम करने की शक्ति है तो उन्हें काम करने दीजिए। 
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कीमोथैरेपी के बाद समय आया सर्जरी का। मेरी सर्जरी 15 घंटे तक चली जो कैंसर की सबसे बड़ी सर्जरी मानी जाती है। शरीर के कई अंग निकाल दिए गए, कई जगह से शरीर काटा गया और इसके बाद मैं बेहोश होकर कोमा में चली गई। डॉक्टरों ने मेरे पति से कहा कि अब शायद यह ठीक नहीं होंगी। आप एक बार उन्हें इस नींद से उठाने का पूरा प्रयास करिए, हो सकता है कोई चमत्कार हो जाए। मेरे पति और परिवार वालों ने प्रयास किए और मैं चार दिन के बाद उस नींद से जाग गई। जागने के बाद मैंने ठाना कि अब जल्द उठकर खड़ा होना है। मैं एक महीने के अंदर ही पूरी तरह से स्वस्थ हो गई और आज मैं कैंसर से 100 प्रतिशत मुक्त हो चुकी हूं। 
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आज मैं सुबह मॉर्निंग वॉक करने हल्की दौड़ लगाने जाती हूं। योग, व्यायाम करती हूं और घर के भी सारे काम करती हूं। मेरा मानना है कि लोग कैंसर में मानसिक रूप से टूटते हैं और हार मान जाते हैं। यदि आप ठान लें कि आपको जीना है तो कैंसर जैसी हजारों परेशानियां आकर निकल जाएंगी और आपका बाल भी बांका नहीं होगा। 
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