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Budget 2024: इंदौर के विशेषज्ञों ने गिनाए फायदे, कमियों पर भी प्रकाश डाला
Thu, 01 Feb 2024 07:23 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Thu, 01 Feb 2024 07:23 PM IST
सार
Budget 2024 : केंद्र सरकार के अंतरिम बजट पर इंदौर के प्रमुख लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसी के अनुसार बजट बेहतर है तो किसी ने कहा कि बहुत सी उम्मीदें अभी बाकि हैं।
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इंदौर के विशेषज्ञ
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
Budget 2024 आ चुका है और इस पर इंदौर के प्रमुख लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। किसी के अनुसार बजट बेहतर है तो किसी ने कहा कि बहुत सी उम्मीदें अभी बाकि हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि आने वाले समय में किन बातों पर काम करना होगा जिससे अर्थव्यवस्था और भी बेहतर बने।
उज्ज्वल भारत का नव संकल्प
आईसीएआई इंदौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए एसएन गोयल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, गरीबों का कल्याण, किसानों की प्रगति व आधारभूत संरचनाओं के विकास की सद्भावना के साथ प्रगतिशील बजट है। जन मानस की आकांक्षाओं को पूरा करने का संकल्प लेकर लक्ष्य निर्धारित किए हैं। भारत विश्व शक्ति बनेगा। 2 करोड़ नए आवास का प्रावधान किया है। कौशल विकास को बढ़ावा दिया है, सौर उर्जा को गति प्रदान करने, ई वाहनों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में गति, पर्यटन में व्यापक इजाफा होगा। लक्ष्यदीप का उत्थान होगा, जनसंख्या नियंत्रण पर कमेटी गठित होगी। आर्थिक प्रबंधन से प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। पिछले की तुलना मे 11% से ज्यादा राशि इन्फ्रास्ट्रक्चर व्यय की जाएगी। आयकर स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं, स्टार्टअप करदाताओं के लिए 1 वर्ष की अवधि बढ़ाई, कारपोरेट कर में कुछ राहत। बजट विकास का परिचायक किन्तु लोक लुभावने वादे नहीं हैं। यही समृद्धि का कारक बनेगा, राष्ट्र प्रथम, बजट स्वागत योग्य है।
कर प्रावधानों में बदलाव ना करके चौंकाया
आईसीएआई इंदौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए आनंद जैन ने कहा कि फिर से सरकार बनाने के आत्मविश्वास से परिपूर्ण यह बजट सरकार की निरंतरता और निपुण कार्यशैली को परिभाषित करता है। चुनावी वर्ष होने के बावजूद किसी भी प्रकार के लुभावने प्रलोभन ना देकर देश की अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। अन्य देशों की तुलना मे भारत अनुसंधान मे बहुत पीछे हैं इस बजट में अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ का प्रावधान निश्चित ही 2047 में भारत को विकसित देश बनाने के उद्देश में एक महत्त्वपूर्ण पायदान होगा। कर प्रावधानों में बदलाव ना करके चौंकाया है। आम करदाता जो इस बार कर प्रणाली में बदलाव की अपेक्षा कर रहे थे, हताश है। पिछले अंतरिम बजट में कर प्रावधानों में कई बदलाव जैसे टैक्स रीबेट और स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी जैसे निर्णय आम करदाता को देख कर किए गए थे जो इस बजट से नदारत हैं। आम करदाता 2014-15 से नहीं बदली गई करमुक्त आय की लिमिट (2.50 लाख से 5 लाख) के साथ होम लोन के ब्याज की छूट (2 लाख से 3 लाख) और धारा 80 सी के तहत मिलने वाली छूट (1.50 लाख से 2.50 लाख) आदि में इजाफे की उम्मीद लगाए बैठे थे। कुल मिलाकर यह बजट युवा, महिला, गरीब, किसान को ध्यान में रखकर अर्थव्यवस्था, इन्फ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान पर केंद्रित है। कर प्रावधानों में बदलाव ना करना एक सुदृढ़ और उपयुक्त कार्यप्रणाली प्रदर्शित करता है।
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कुछ अपेक्षाएं बाकि रह गईं, उम्मीद है सरकार जल्द ध्यान देगी
इंडियन प्लास्टपैक फोरम के पूर्व अध्यक्ष व्रजेश गांधी ने बताया कि मोदी सरकार से कुछ अपेक्षाएं आम जनता ने रखी थी, जो अभी तो पूरी नहीं हुई लेकिन आशा है आने वाले बजट में सरकार निम्न बिंदुओ पर भी जरूर ध्यान देगी। कम से कम 10 लाख तक की कमाई टैक्स मुक्त होना चाहिए। मेडिक्लेम के बढ़ते खर्च को देखते हुए अगर सुपर सीनियर सिटीजन ( 80+ ) के लिए बिना कोई आवक के बंधन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपए तक का मेडिक्लेम मुफ्त कर देते तो उत्तम होता। सीनियर सिटीजन ( 80+ ) के लिए सरकार को एक और सुविधा करनी चाहिए, उनकी बैंक में जमा FD या अन्य बचत पर ब्याज प्रतिशत 9 % और उस आवक पर संपूर्ण टैक्स माफ कर देना चाहिए, बिना कोई फार्म या रिटर्न फाइल करे। साल में दो लाख से ज्यादा का टैक्स देने वालों के लिए कुछ अतिरिक्त सुविधाएं होना चाहिए। जैसे पेंशन या अपने पहले के जीवन के लिए की गई व्यवस्था के मैच्योर होने पर उस आवक पर टैक्स माफी जैसे कुछ प्रावधान हों। उम्मीद है आने वाले सालों में सरकार इसके बारे में जरूर सोचेगी। आजकल की नई पीढ़ी में बचत का महत्व कम हो रहा है। अब नए आए टैक्स रेसिम से PF LIC में बचत भी कम होगी। तो सरकार का यह दायित्व है की इस पीढ़ी को टैक्स में कुछ अच्छे प्रावधान कर बचत करने को प्रेरित करे वह बहुत जरूरी है। बच्चों के अभ्यास में धीरे धीरे आरक्षण खत्म करने का प्रवाधान कर, उन पिछड़े और अन्य वर्गो के बच्चों के लिए फीस माफ़ी या निम्न ब्याज वाले शैक्षणिक कर्ज जैसे कुछ उपाय करना चाहिए। जिससे शिक्षण का स्तर सुधरेगा और देश के युवा को परदेश जाने से रोका जा सकेगा। कोरोना काल से चल रही, फ्री में बांटी जा रही सुविधा, अनाज, अन्य राशन, मुफ्त बिजली आदि को क्रमशः बंद करने दिशा में, कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 करोड़ घरों के लिए छत पर सौर पैनल योजना की घोषणा की जो सराहनीय है। इसमें प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना के तहत 300 इकाइयां मुफ्त में दी जाएंगी। यह योजना उपयोगकर्ताओं को प्रति वर्ष 15000-18000 रुपए तक बचाने में मदद करेगी।
राम काज से जन काज वाला बजट
भाजपा प्रवक्ता, खनीज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू नें अंतरिम बजट को विकसित, समर्थ, सुदृढ़ भारत की दूरगामी सोच का राम काज के बाद जन काज वाला राम चरणामृत वाला पंचामृत बजट बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट से सभी खुश रहें, आबाद रहें, सम्पन्नता को प्राप्त हों यह गारंटी भी दी है। पूंजीगत व्यय में 11 लाख 11 हजार लाख करोड़ का प्रावधान, रक्षा खर्च में 11 % बढ़ोत्री, स्टार्टअप में टैक्स रियायत, नए 150 एयरपोर्ट, तीन रेल कारीडार, लखपति बहना, 41 हजार वन्दे भारत जैसे नए कोच, पीएम आवास योजना में 2 करोड़ नए घर व 5 इंटिग्रेटेड एकवा पार्क जैसे बजट प्राविधानों से मांग-आपूर्ति की इकोनॉमी के जरिए आय, रोजगार और मैनूफेक्चरिंग समृद्धि बढ़ेगी। प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से उपभोग बढ़ेगा, इससे रोजगार बढ़ेगा। बजट का आकार, कर प्राप्ति, जीडीपी बढ़ेगी। अगले वर्ष वित्तीय घाटे का लक्ष्य 5.1% रखने का उल्लेखनीय लक्ष्य वित्तीय अनुशासन के संकल्प की सिद्धि की कहानी कहता है। आयुष्मान योजना में आशा वर्कर्स को शामिल करना, लड़कियों को मुफ्त टीकाकरण, किसान सम्मान निधि आदि के प्रावधान सामाजिक सरोकार की प्रतिबद्धता के संकल्प की पुष्टि भी करता है। किसान, युवा, महिला, बजट में सबकुछ कवर किया है। यह रोजगार के 55 लाख से ज्यादा अवसर सृजित करेगा।
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उज्ज्वल भारत का नव संकल्प
आईसीएआई इंदौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए एसएन गोयल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, गरीबों का कल्याण, किसानों की प्रगति व आधारभूत संरचनाओं के विकास की सद्भावना के साथ प्रगतिशील बजट है। जन मानस की आकांक्षाओं को पूरा करने का संकल्प लेकर लक्ष्य निर्धारित किए हैं। भारत विश्व शक्ति बनेगा। 2 करोड़ नए आवास का प्रावधान किया है। कौशल विकास को बढ़ावा दिया है, सौर उर्जा को गति प्रदान करने, ई वाहनों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में गति, पर्यटन में व्यापक इजाफा होगा। लक्ष्यदीप का उत्थान होगा, जनसंख्या नियंत्रण पर कमेटी गठित होगी। आर्थिक प्रबंधन से प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। पिछले की तुलना मे 11% से ज्यादा राशि इन्फ्रास्ट्रक्चर व्यय की जाएगी। आयकर स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं, स्टार्टअप करदाताओं के लिए 1 वर्ष की अवधि बढ़ाई, कारपोरेट कर में कुछ राहत। बजट विकास का परिचायक किन्तु लोक लुभावने वादे नहीं हैं। यही समृद्धि का कारक बनेगा, राष्ट्र प्रथम, बजट स्वागत योग्य है।
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कर प्रावधानों में बदलाव ना करके चौंकाया
आईसीएआई इंदौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए आनंद जैन ने कहा कि फिर से सरकार बनाने के आत्मविश्वास से परिपूर्ण यह बजट सरकार की निरंतरता और निपुण कार्यशैली को परिभाषित करता है। चुनावी वर्ष होने के बावजूद किसी भी प्रकार के लुभावने प्रलोभन ना देकर देश की अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। अन्य देशों की तुलना मे भारत अनुसंधान मे बहुत पीछे हैं इस बजट में अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ का प्रावधान निश्चित ही 2047 में भारत को विकसित देश बनाने के उद्देश में एक महत्त्वपूर्ण पायदान होगा। कर प्रावधानों में बदलाव ना करके चौंकाया है। आम करदाता जो इस बार कर प्रणाली में बदलाव की अपेक्षा कर रहे थे, हताश है। पिछले अंतरिम बजट में कर प्रावधानों में कई बदलाव जैसे टैक्स रीबेट और स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी जैसे निर्णय आम करदाता को देख कर किए गए थे जो इस बजट से नदारत हैं। आम करदाता 2014-15 से नहीं बदली गई करमुक्त आय की लिमिट (2.50 लाख से 5 लाख) के साथ होम लोन के ब्याज की छूट (2 लाख से 3 लाख) और धारा 80 सी के तहत मिलने वाली छूट (1.50 लाख से 2.50 लाख) आदि में इजाफे की उम्मीद लगाए बैठे थे। कुल मिलाकर यह बजट युवा, महिला, गरीब, किसान को ध्यान में रखकर अर्थव्यवस्था, इन्फ्रास्ट्रक्चर, अनुसंधान पर केंद्रित है। कर प्रावधानों में बदलाव ना करना एक सुदृढ़ और उपयुक्त कार्यप्रणाली प्रदर्शित करता है।
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कुछ अपेक्षाएं बाकि रह गईं, उम्मीद है सरकार जल्द ध्यान देगी
इंडियन प्लास्टपैक फोरम के पूर्व अध्यक्ष व्रजेश गांधी ने बताया कि मोदी सरकार से कुछ अपेक्षाएं आम जनता ने रखी थी, जो अभी तो पूरी नहीं हुई लेकिन आशा है आने वाले बजट में सरकार निम्न बिंदुओ पर भी जरूर ध्यान देगी। कम से कम 10 लाख तक की कमाई टैक्स मुक्त होना चाहिए। मेडिक्लेम के बढ़ते खर्च को देखते हुए अगर सुपर सीनियर सिटीजन ( 80+ ) के लिए बिना कोई आवक के बंधन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपए तक का मेडिक्लेम मुफ्त कर देते तो उत्तम होता। सीनियर सिटीजन ( 80+ ) के लिए सरकार को एक और सुविधा करनी चाहिए, उनकी बैंक में जमा FD या अन्य बचत पर ब्याज प्रतिशत 9 % और उस आवक पर संपूर्ण टैक्स माफ कर देना चाहिए, बिना कोई फार्म या रिटर्न फाइल करे। साल में दो लाख से ज्यादा का टैक्स देने वालों के लिए कुछ अतिरिक्त सुविधाएं होना चाहिए। जैसे पेंशन या अपने पहले के जीवन के लिए की गई व्यवस्था के मैच्योर होने पर उस आवक पर टैक्स माफी जैसे कुछ प्रावधान हों। उम्मीद है आने वाले सालों में सरकार इसके बारे में जरूर सोचेगी। आजकल की नई पीढ़ी में बचत का महत्व कम हो रहा है। अब नए आए टैक्स रेसिम से PF LIC में बचत भी कम होगी। तो सरकार का यह दायित्व है की इस पीढ़ी को टैक्स में कुछ अच्छे प्रावधान कर बचत करने को प्रेरित करे वह बहुत जरूरी है। बच्चों के अभ्यास में धीरे धीरे आरक्षण खत्म करने का प्रवाधान कर, उन पिछड़े और अन्य वर्गो के बच्चों के लिए फीस माफ़ी या निम्न ब्याज वाले शैक्षणिक कर्ज जैसे कुछ उपाय करना चाहिए। जिससे शिक्षण का स्तर सुधरेगा और देश के युवा को परदेश जाने से रोका जा सकेगा। कोरोना काल से चल रही, फ्री में बांटी जा रही सुविधा, अनाज, अन्य राशन, मुफ्त बिजली आदि को क्रमशः बंद करने दिशा में, कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 करोड़ घरों के लिए छत पर सौर पैनल योजना की घोषणा की जो सराहनीय है। इसमें प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना के तहत 300 इकाइयां मुफ्त में दी जाएंगी। यह योजना उपयोगकर्ताओं को प्रति वर्ष 15000-18000 रुपए तक बचाने में मदद करेगी।
राम काज से जन काज वाला बजट
भाजपा प्रवक्ता, खनीज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू नें अंतरिम बजट को विकसित, समर्थ, सुदृढ़ भारत की दूरगामी सोच का राम काज के बाद जन काज वाला राम चरणामृत वाला पंचामृत बजट बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट से सभी खुश रहें, आबाद रहें, सम्पन्नता को प्राप्त हों यह गारंटी भी दी है। पूंजीगत व्यय में 11 लाख 11 हजार लाख करोड़ का प्रावधान, रक्षा खर्च में 11 % बढ़ोत्री, स्टार्टअप में टैक्स रियायत, नए 150 एयरपोर्ट, तीन रेल कारीडार, लखपति बहना, 41 हजार वन्दे भारत जैसे नए कोच, पीएम आवास योजना में 2 करोड़ नए घर व 5 इंटिग्रेटेड एकवा पार्क जैसे बजट प्राविधानों से मांग-आपूर्ति की इकोनॉमी के जरिए आय, रोजगार और मैनूफेक्चरिंग समृद्धि बढ़ेगी। प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से उपभोग बढ़ेगा, इससे रोजगार बढ़ेगा। बजट का आकार, कर प्राप्ति, जीडीपी बढ़ेगी। अगले वर्ष वित्तीय घाटे का लक्ष्य 5.1% रखने का उल्लेखनीय लक्ष्य वित्तीय अनुशासन के संकल्प की सिद्धि की कहानी कहता है। आयुष्मान योजना में आशा वर्कर्स को शामिल करना, लड़कियों को मुफ्त टीकाकरण, किसान सम्मान निधि आदि के प्रावधान सामाजिक सरोकार की प्रतिबद्धता के संकल्प की पुष्टि भी करता है। किसान, युवा, महिला, बजट में सबकुछ कवर किया है। यह रोजगार के 55 लाख से ज्यादा अवसर सृजित करेगा।
