{"_id":"69fb5ecbf343ecb21a0c2cc3","slug":"bhojshala-case-the-petitioner-claimed-the-bhojshala-complex-was-a-temple-dedicated-to-the-jain-goddess-ambika-2026-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोजशाला केस- याचिकाकर्ता ने भोजशाला परिसर को बताया जैन देवी अंबिका का मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोजशाला केस- याचिकाकर्ता ने भोजशाला परिसर को बताया जैन देवी अंबिका का मंदिर
Thu, 07 May 2026 06:01 AM IST
Abhishek Chendke
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke
Updated Thu, 07 May 2026 06:01 AM IST
सार
धार स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। मंगलवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भोजशाला परिसर मूल रूप से जैन देवी अंबिका का मंदिर है।
विज्ञापन
धार भोजशाला।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भोजशाला मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान सलेकचंद जैन की याचिका पर सुनवाई हुई। उनके वकील ने बताया कि वर्तमान भोजशाला परिसर मूल रूप से प्राचीन गुरुकुल और जैन मंदिर है जिसे मुस्लिम शासकों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। हिंदू समाज जिसे वागदेवी की मूर्ति होना बता रहा है वास्तव में वह जैन देवी अंबिका की है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज उनके देवी देवताओं और भगवान की पूजा करते हैं उसी प्रकार जैन धर्मावलंबी उनके 24 तीर्थंकरों की पूजा करते हैं । जिस प्रकार हिंदू समाज में शंकर भगवान के मंदिर पूरे देश में हैं वैसे ही अंबिका देवी जैन समाज में बहुत प्रचलित हैं। इसकी मात्राएं ठीक कर दो सभी तीर्थंकरों के साथ अलग-अलग चिह्न हैं। आदिनाथ के साथ बैल और महावीर के साथ शेर हैं। सभी तीर्थंकरों को उनके बैठने के तरीके से पहचाना जाता है। एएसअाई की सर्वे रिपोर्ट में बताए गए चिह्न इन्हें जैन तीर्थंकरों का होना दर्शाते हैं।
वकील ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को चुनौती भी चुनौती दी। जिसमें केवल हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों शुक्रवार को नमाज करने की अनुमति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में प्रदत्त जैन समुदाय के मौलिक धार्मिक अधिकारों का हनन करता है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि संस्कृत विद्वान राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वीं में धार में जैन देवी अंबिका की प्रतिमा स्थापित की थी। यह प्रतिमा 1875 में ब्रिटिश सरकार को मिली थी और वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है।
विज्ञापन
माइकल विलेज और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मूर्ति प्रसाद तिवारी द्वारा लिखित पुस्तकों का उल्लेख कर पूर्व का इतिहास भी बताया। 1881-82 की सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि धार की मस्जिदें जैन अवशेषों और स्तंभों पर निर्मित की गई हैं। वर्तमान संरचना में जैन वास्तुकला, स्तंभ और जैन क्षेत्रपाल (भैरव) की छवियों की मौजूदगी को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जैन अंबिका देवी की मूर्ति को भारत लाकर में भोजशाला में स्थापित किया जाए और भोजशाला के वास्तविक स्वरूप को जैन मंदिर के रूप में बहाल कर जैन धर्मावलंबियों को वहाँ नियमित पूजा अर्चना करने की अनुमति प्रदान की जाए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज उनके देवी देवताओं और भगवान की पूजा करते हैं उसी प्रकार जैन धर्मावलंबी उनके 24 तीर्थंकरों की पूजा करते हैं । जिस प्रकार हिंदू समाज में शंकर भगवान के मंदिर पूरे देश में हैं वैसे ही अंबिका देवी जैन समाज में बहुत प्रचलित हैं। इसकी मात्राएं ठीक कर दो सभी तीर्थंकरों के साथ अलग-अलग चिह्न हैं। आदिनाथ के साथ बैल और महावीर के साथ शेर हैं। सभी तीर्थंकरों को उनके बैठने के तरीके से पहचाना जाता है। एएसअाई की सर्वे रिपोर्ट में बताए गए चिह्न इन्हें जैन तीर्थंकरों का होना दर्शाते हैं।
विज्ञापन
वकील ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को चुनौती भी चुनौती दी। जिसमें केवल हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों शुक्रवार को नमाज करने की अनुमति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 में प्रदत्त जैन समुदाय के मौलिक धार्मिक अधिकारों का हनन करता है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि संस्कृत विद्वान राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वीं में धार में जैन देवी अंबिका की प्रतिमा स्थापित की थी। यह प्रतिमा 1875 में ब्रिटिश सरकार को मिली थी और वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी गई है।
विज्ञापन
माइकल विलेज और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मूर्ति प्रसाद तिवारी द्वारा लिखित पुस्तकों का उल्लेख कर पूर्व का इतिहास भी बताया। 1881-82 की सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि धार की मस्जिदें जैन अवशेषों और स्तंभों पर निर्मित की गई हैं। वर्तमान संरचना में जैन वास्तुकला, स्तंभ और जैन क्षेत्रपाल (भैरव) की छवियों की मौजूदगी को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जैन अंबिका देवी की मूर्ति को भारत लाकर में भोजशाला में स्थापित किया जाए और भोजशाला के वास्तविक स्वरूप को जैन मंदिर के रूप में बहाल कर जैन धर्मावलंबियों को वहाँ नियमित पूजा अर्चना करने की अनुमति प्रदान की जाए।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
