Indore: एमटीएच कपाउंड अस्पताल में जून में हो गई थी 55 बच्चों की मौतें
अस्पताल में भर्ती मरीजों को सरकार की तरफ से दूध की थैलियां दी जाती है। दूध को गर्म करनेे के लिए परिजनों को तीसरी मंजिल से नीचे कैंटिन तक जाना पड़ता है। वहां भी मरीजों की कतार लगी रहती है।
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इंदौर के एमटीएच अस्पताल में दो नवजातों की मौत पर हल्ला मचा है। डाक्टर मौत की वजह स्वाभाविक बता रहे है, जबकि परिजन इसे लापरवाही बता रहे है। अस्पताल में सुविधा की कमी नजर अाती है। वार्डों में गंदगी रहती है। गुरुवार को दो नवजातों की मौत के बाद स्टाॅफ सक्रिय हुआ और अस्पताल की दीवारों से पान की पिक, गंदगी उठाते कर्मचारी नजर आए। अस्पताल में पर्याप्त स्टाॅफ भी नहीं है। भर्ती मरीजों की देखभाल भी ठीक से नहीं हो पाती है। बीते छह दिन में अस्पताल में 20 मौतें हो चुकी है, जबकि जून माह में 55 बच्चों की मौत अस्पताल में हो चुकी है, जबकि 303 बच्चे पिछले माह भर्ती थे।
औसत तीन बच्चों की मौत प्रतिदिन
अधीक्षक पीएस ठाकुर के अनुसार औसत तीन बच्चों की मौतें प्रतिदिन अस्पताल में होती है। पूरे संभाग से बच्चों के गंभीर केस यहां रेफर होते हैै। गुरुवार को जिस बच्चे की मौत हुई, उसके माता-पिता भी उज्जैन के है और प्रिमेच्योर डिलेवरी हुई थी।
वार्डों में गंदगी, कैंटिन में भी सफाई नहीं
एमटीएच अस्पताल में गंदगी काफी रहती है। वार्डों के शौचालय साफ नहीं होते। अस्पताल की उपरी मंजिल पर जाने के लिए बनाए गए रैम्प पर यहां वहां गुटखे और पान की पिक नजर आ रही थी।
नीचे जाते है दूध गर्म करने परिजन
अस्पताल में भर्ती मरीजों को सरकार की तरफ से दूध की थैलियां दी जाती है। दूध को गर्म करनेे के लिए परिजनों को तीसरी मंजिल से नीचे कैंटिन तक जाना पड़ता है। वहां भी मरीजों की कतार लगी रहती है। गुरुवार को जिस बच्चे की मौत हुई। उसके परिजनों ने भी कहा कि दूध पिलाने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी थी।
