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मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाले में सजा: इंदौर की स्पेशल कोर्ट ने सुनाई पांच साल की सजा, दोषी ने खुद को बेगुनाह बताते हुए किया था सरेंडर
Mon, 17 Jan 2022 04:29 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Mon, 17 Jan 2022 04:29 PM IST
सार
व्यापमं घोटाले के एक आरोपी को इंदौर की स्पेशल कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। आरोपी ने खुद ही कोर्ट में सरेंडर किया था और खुद को बेगुनाह बताते हुए फंसाने की बात कही थी। हालांकि सबूतों के चलते कोर्ट ने उसे पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
व्यापमं घोटाले के एक आरोपी को इंदौर की स्पेशल कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। आरोपी ने खुद ही कोर्ट में सरेंडर किया था और खुद को बेगुनाह बताते हुए फंसाने की बात कही थी। हालांकि सबूतों के चलते कोर्ट ने उसे पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।
आरोपी का नाम सेतुराज पिता शैलेंद्र कुमार सिंह (38) निवासी मिनाल रेसीडेंसी भोपाल है। उसका परिवार मूल रूप से बिहार के बेगुसराय का रहने वाला है। आरोपी फरार चल रहा था। उसके साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसी बीच आरोपी ने इंदौर की स्पेशल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। जज से कहा कि उसे राजनीतिक कारणों के चलते फंसाया जा रहा है। हालांकि सबूत उसके खिलाफ थे इसके चलते कोर्ट ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।
दरअसल, आरोपी सेतुराज करुणा मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम के संचालक डॉ. हेमंतकुमार कंसल के बेटे ईशान के संपर्क में भोपाल में आया था। ईशान अपने नाना के यहां रहकर पीएमटी की तैयारी कर रहा था। सेतुराज, उसके साथी उमेशकुमार श्रीवास्तव निवासी कोरिया (छत्तीसगढ़), प्रवीणकुमार राठौर निवासी फर्रुखाबाद (उप्र) व सौरभकुमार रक्षित निवासी पटना ने इंदौर आकर ईशान के पिता से वर्ष 2011 में आयोजित होने वाली पीएमटी में ईशान का मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन करने का झांसा देकर करीब 13 लाख रुपए ठग लिए थे।
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जब ईशान का चयन नहीं हुआ तो उसके पिता ने रुपये मांगे। आरोपियों ने रुपये लौटाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर ने चारों के खिलाफ संयोगितागंज थाने में धोखाधड़ी व दस्तावेजों में हेरफेर का मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में तीन आरोपियों को कोर्ट ने 11 दिसंबर 2021 को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी सेतुराज फरार था। बाद में वह कोर्ट में पेश हुआ और उसे भी पांच साल के लिए जेल भेज दिया।
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आरोपी का नाम सेतुराज पिता शैलेंद्र कुमार सिंह (38) निवासी मिनाल रेसीडेंसी भोपाल है। उसका परिवार मूल रूप से बिहार के बेगुसराय का रहने वाला है। आरोपी फरार चल रहा था। उसके साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसी बीच आरोपी ने इंदौर की स्पेशल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। जज से कहा कि उसे राजनीतिक कारणों के चलते फंसाया जा रहा है। हालांकि सबूत उसके खिलाफ थे इसके चलते कोर्ट ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।
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दरअसल, आरोपी सेतुराज करुणा मेटरनिटी एवं नर्सिंग होम के संचालक डॉ. हेमंतकुमार कंसल के बेटे ईशान के संपर्क में भोपाल में आया था। ईशान अपने नाना के यहां रहकर पीएमटी की तैयारी कर रहा था। सेतुराज, उसके साथी उमेशकुमार श्रीवास्तव निवासी कोरिया (छत्तीसगढ़), प्रवीणकुमार राठौर निवासी फर्रुखाबाद (उप्र) व सौरभकुमार रक्षित निवासी पटना ने इंदौर आकर ईशान के पिता से वर्ष 2011 में आयोजित होने वाली पीएमटी में ईशान का मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन करने का झांसा देकर करीब 13 लाख रुपए ठग लिए थे।
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जब ईशान का चयन नहीं हुआ तो उसके पिता ने रुपये मांगे। आरोपियों ने रुपये लौटाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर ने चारों के खिलाफ संयोगितागंज थाने में धोखाधड़ी व दस्तावेजों में हेरफेर का मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में तीन आरोपियों को कोर्ट ने 11 दिसंबर 2021 को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी सेतुराज फरार था। बाद में वह कोर्ट में पेश हुआ और उसे भी पांच साल के लिए जेल भेज दिया।
