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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: The officer overturned the statement in the court, said- I do not know who killed the bat, I was talking on mobile

इंदौर: कोर्ट में बयान से पलटे अधिकारी, कहा- मुझे नहीं पता किसने मारा था बल्ला, मैं मोबाइल पर बात कर रहा था

Sat, 19 Feb 2022 12:14 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Sat, 19 Feb 2022 12:14 PM IST
सार

इंदौर के बहुचर्चित बल्लाकांड में अधिकारी ने कोर्ट में बयान बदल दिए। कहा कि घटना के वक्त वे मोबाइल पर बात कर रहे थे। उन्हें नहीं पता किसने बल्ला मारा था। आकाश विजयवर्गीय को बल्ला मारते हुए नहीं देखा।

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Indore: The officer overturned the statement in the court, said- I do not know who killed the bat, I was talking on mobile
घटना वाले दिन की तस्वीर जिसमें विधायक आकाश विजयवर्गीय के हाथ में दिख रहा है बल्ला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के बहुचर्चित बल्ला कांड मामले में अधिकारी के बयान बदल गए हैं। कोर्ट में अधिकारी ने कहा कि उन्हें नहीं पता बल्ला किसने मारा था। घटना के वक्त वे मोबाइल पर बात कर रहे थे और बल्ला पीछे से किसी ने मारा था, इसलिए देख नहीं सका किसने मारा है। 
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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के इंदौर में जून 2019 में बल्लाकांड हुआ था। गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की कार्रवाई के दौरान विवाद  हो गया था। विधायक आकाश विजयवर्गीय भी घटनास्थल पर थे। कार्रवाई के दौरान उनका नगर निगम के अफसरों से विवाद हुआ। इसके बाद आरोप लगे थे कि विधायक विजयवर्गीय ने निगम के तत्कालीन  भवन निरीक्षक धीरेंद्र बायस को क्रिकेट खेलने के बल्ले से पीट दिया था। इस घटना में विजयवर्गीय की गिरफ्तारी भी हुई थी। भोपाल के विशेष न्यायालय में अब तक मामले की सुनवाई चल रही थी। इंदौर में इस संबंध में विशेष न्यायालय गठित होने के बाद शुक्रवार को विजयवर्गीय के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने वाले निगम अधिकारी बायस का प्रतिपरीक्षण हुआ। इसमें वे कोर्ट में बयान से पलट गए। उन्होंने  कहा कि घटना के वक्त वे मोबाइल पर बात कर रहे थे। उन्हें नहीं पता कि उन्हें बल्ला किसने मारा था क्योंकि बल्ला पीछे से चला था। उन्होंने विजयवर्गीय को बल्ला मारते हुए नहीं देखा था। विजयवर्गीय के हाथ में बल्ला देख उन्होंने रिपोर्ट में उनका नाम लिखवा दिया था। विधायक विजयवर्गीय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अविनाश सिरपुरकर ने बताया कि मामले में फरियादी बायस ने कोर्ट को बताया कि जिस वक्त वे रिमूवल कार्रवाई के लिए पहुंचे थे उस वक्त वहां सौ से ज्यादा लोग जमा थे। विजयवर्गीय करीब 15 मिनट बाद वहां पहुंचे थे। बायस मोबाइल पर किसी से बात कर रहे थे कि किसी ने पीछे से उनके पैर पर बल्ला मार दिया। उन्होंने बल्ला मारने वाले का चेहरा नहीं देखा था। जब वे पीछे मुड़े तो उन्होंने देखा कि तीन चार लोगों के हाथ में बल्ला हैं। विजयवर्गीय के हाथ में भी बल्ला था इसी आधार पर उन्होंने उनका नाम लिखवा दिया था। मामले में अब 25 फरवरी को अन्य गवाहों के बयान होंगे।
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