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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Supreme Court changed the High Court's decision, Municipal Corporation got the valuable land of Milkyway Talkies

इंदौर: सुप्रीम कोर्ट ने बदला हाईकोर्ट का फैसला, नगर निगम को मिली मिल्कीवे टॉकीज की कीमती जमीन

Wed, 02 Mar 2022 07:31 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Wed, 02 Mar 2022 07:31 PM IST
सार

इंदौर के एमजी रोड स्थित मिल्कीवे टॉकीज की कीमती जमीन नगर निगम को मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बदलकर निगम के हक में फैसला दिया है। बरसों पहले नगर निगम ने यह जमीन लीज पर दी थी जिस पर मिल्कीवे टॉकीज चल रहा था।

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Indore: Supreme Court changed the High Court's decision, Municipal Corporation got the valuable land of Milkyway Talkies
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से इंदौर नगर निगम को बड़ी राहत मिली है। एमजी रोड पर मिल्कीवे टॉकीज की कीमती जमीन का मालिकाना हक नगर निगम को मिल गया है। हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में नगर निगम सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
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जानकारी के मुताबिक एमजी रोड पर मिल्कीवे टॉकीज की 19200 वर्ग फीट जमीन है। इसका मामला कोर्ट में चल रहा था। यह जमीन कई साल पहले नगर निगम ने होमी रागीना नामक व्यक्ति को लीज पर दी थी। जमीन टॉकीज चलाने के लिए दी गई थी। दशकों तक यहां मिल्कीवे के नाम से टॉकीज का संचालन हुआ। 1992-93 में भी इस जमीन की लीज समाप्त हो गई थी। इस पर नगर निगम ने इसका नवीनीकरण कर दिया था। कुछ साल बाद टॉकीज चलाने वालों ने टॉकीज बंद कर दिया। जमीन पर कब्जे की शिकायतें मिलने लगीं। टॉकीज बंद करने के मामले में राज्य शासन ने जमीन की लीज निरस्त कर दी।
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शासन के इस फैसले के विरोध में रागीना परिवार जिला न्यायालय पहुंचा। कोर्ट में तर्क रखा कि जमीन नगर निगम की है, निगम ने ही लीज पर दी थी। नवीनीकरण भी हो चुका है। ऐसे में राज्य शासन को लीज निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है। जिला कोर्ट ने रागीना परिवार का दावा स्वीकारते हुए शासन के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना था कि जमीन निगम की है इसलिए राज्य शासन लीज निरस्त नहीं कर सकती। जिला न्यायालय के इस फैसले के विरोध में राज्य शासन मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ पहुंचा लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय के फैसले को यथावत रखा।
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इसके बाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए नगर निगम ने एडवोकेट मनोज मुंशी और दिल्ली के एडवोकेट सौरभ मिश्रा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। निगम की तरफ से तर्क रखे गए कि रागीना परिवार को जमीन एक विशेष प्रयोजन के लिए दी गई थी। जमीन पर संचालित होने वाला टॉकीज सालों पहले बंद हो चुका है। जब जमीन लीज पर देने का प्रयोजन ही पूरा नहीं हो रहा तो लीज निरस्त की जा सकती है। एडवोकेट मनोज मुंशी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति राम सुब्रह्मण्यम की युगल पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए माना कि जमीन भले ही निगम की थी, लेकिन उसकी लीज निरस्त करने का अधिकार राज्य सरकार को है। इस फैसले के बाद अब यह जमीन नगर निगम के मालिकाना हक की हो गई। 
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