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इंदौर: मिल्की वे टॉकीज की बेशकीमती जमीन पर नगर निगम ने लिया कब्जा, जेसीबी से हटाई दुकानें
Mon, 14 Mar 2022 05:11 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Mon, 14 Mar 2022 05:11 PM IST
सार
रीगल चौराहा स्थित मिल्की वे टॉकीज की जमीन पर नगर निगम ने कब्जा ले लिया। सोमवार सुबह कार्रवाई कर यहां स्थित दुकानों व गैरेज को हटाया। इस जमीन की लीज निरस्ती के फैसले को पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था।
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जेसीबी की मदद से निगम ने हटाई दुकानें
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
रीगल चौराहे पर स्थित मिल्की वे टॉकीज की 19200 वर्ग फीट की जमीन पर बनी दुकानों को नगर निगम ने हटा दिया। पिछले दिनों उक्त जमीन की लीज का मामला नगर निगम सुप्रीम कोर्ट में जीत चुका था। इसके बाद करीब निगम ने भूमि का कब्जा लेने के लिए नोटिस जारी किया था। जिन लोगों ने जमीन पर कब्जा किया था उनको सात दिन में हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सोमवार सुबह निगम की टीम ने कब्जा हटा दिया।
दरअसल, कुछ समय पहले ही नगर निगम ने रीगल सिनेमा की जमीन अपने आधिपत्य में ले ली थी। उसका प्रकरण भी इसी प्रकार लीज निरस्ती के दायरे में था और तीन से चार वर्ष पहले निगम ने कब्जा लेकर वहां ताले डाल दिए थे। इसके बाद समीप की मिल्की वे टॉकीज की जमीन का मामला भी न्यायालय में चल रहा था। निगम अफसरों के मुताबिक लीज निरस्ती के प्रकरण को लेकर विभिन्न न्यायालयों में चुनौती दी गई थी और फिर आखिर में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां लीज निरस्ती का प्रकरण जीतने के बाद निगम ने हाल ही में सात दिन पहले भूमि को लेकर पांच संबंधितों को नोटिस जारी कर आधिपत्य देने के निर्देश दिए थे। नोटिस मिल्की वे टॉकीज की इमारत पर चस्पा कर दिया गया था। इसके बाद सोमवार सुबह निगम कब्जा लेने पहुंचा। जेसीबी की मदद से दुकानों व गैरेज को हटाया। बताया जा रहा है कि प्रशासन और निगम के अधिकारियों की पिछले दिनों बैठक के दौरान रीगल टॉकीज की ली गई जमीन पर कुछ बड़े प्रोजेक्ट को लेकर मंथन हुआ था। इसी बीच निगम को मिल्की वे टॉकीज की 19200 वर्गफीट जमीन भी मिल चुकी है। दोनों जमीनें पास-पास हैं, जिसके चलते संयुक्त रूप से वहां निगम कोई बड़ा प्रोजेक्ट ला सकता है।
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दरअसल, कुछ समय पहले ही नगर निगम ने रीगल सिनेमा की जमीन अपने आधिपत्य में ले ली थी। उसका प्रकरण भी इसी प्रकार लीज निरस्ती के दायरे में था और तीन से चार वर्ष पहले निगम ने कब्जा लेकर वहां ताले डाल दिए थे। इसके बाद समीप की मिल्की वे टॉकीज की जमीन का मामला भी न्यायालय में चल रहा था। निगम अफसरों के मुताबिक लीज निरस्ती के प्रकरण को लेकर विभिन्न न्यायालयों में चुनौती दी गई थी और फिर आखिर में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जहां लीज निरस्ती का प्रकरण जीतने के बाद निगम ने हाल ही में सात दिन पहले भूमि को लेकर पांच संबंधितों को नोटिस जारी कर आधिपत्य देने के निर्देश दिए थे। नोटिस मिल्की वे टॉकीज की इमारत पर चस्पा कर दिया गया था। इसके बाद सोमवार सुबह निगम कब्जा लेने पहुंचा। जेसीबी की मदद से दुकानों व गैरेज को हटाया। बताया जा रहा है कि प्रशासन और निगम के अधिकारियों की पिछले दिनों बैठक के दौरान रीगल टॉकीज की ली गई जमीन पर कुछ बड़े प्रोजेक्ट को लेकर मंथन हुआ था। इसी बीच निगम को मिल्की वे टॉकीज की 19200 वर्गफीट जमीन भी मिल चुकी है। दोनों जमीनें पास-पास हैं, जिसके चलते संयुक्त रूप से वहां निगम कोई बड़ा प्रोजेक्ट ला सकता है।
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दुकानें व गैरेज हटाने के बाद खाली हो गई जमीन
- फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था लीज निरस्ती का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में मिल्की वे टॉकीज के जमीन के संबंध में हुए फैसले में निगम के पक्ष में एक अपील का निराकरण करते हुए शासन द्वारा मिल्की वे टॉकीज की जमीन की लीज निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया गया था।
गौरतलब है कि मिल्की वे टॉकीज के बंद होने के बाद लीजग्रहिता ने जमीन को अलग-अलग हिस्सों में कई लोगों को किराये पर दे दिया था। किराये पर जमीन लेने के बाद कई लोगों ने पक्के निर्माण भी कर लिए थे। यहां पर अभी तक चाय-नाश्ते की दुकानों के अलावा अन्य कई दुकानें भी संचालित हो रही थीं। इस वजह से लीज का उल्लंघन होने पर नगर निगम ने लीज निरस्त कर जमीन को अपने कब्जे में लिया।
सुप्रीम कोर्ट में मिल्की वे टॉकीज के जमीन के संबंध में हुए फैसले में निगम के पक्ष में एक अपील का निराकरण करते हुए शासन द्वारा मिल्की वे टॉकीज की जमीन की लीज निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया गया था।
गौरतलब है कि मिल्की वे टॉकीज के बंद होने के बाद लीजग्रहिता ने जमीन को अलग-अलग हिस्सों में कई लोगों को किराये पर दे दिया था। किराये पर जमीन लेने के बाद कई लोगों ने पक्के निर्माण भी कर लिए थे। यहां पर अभी तक चाय-नाश्ते की दुकानों के अलावा अन्य कई दुकानें भी संचालित हो रही थीं। इस वजह से लीज का उल्लंघन होने पर नगर निगम ने लीज निरस्त कर जमीन को अपने कब्जे में लिया।
