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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Heart of 23-day-old newborn was beating 350 times in a minute, life was saved by giving electric shock.

इंदौर: एक मिनट में 350 बार धड़क रहा था 23 दिन के नवजात का दिल, बिजली के झटके देकर बचाई जान...

Mon, 07 Feb 2022 01:29 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Mon, 07 Feb 2022 01:29 PM IST
सार

23 दिन के नवजात शिशु का दिल एक मिनट में 350 बार धड़क रहा था। दवाइयों से भी जब नियंत्रित नहीं हुआ तो उसे बिजली के झटके दिए गए। इससे वह सामान्य हुआ। इंदौर में इतने छोटे शिशु को बिजली के झटके देने का मामला संभवतः पहली बार हुआ है।

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Indore: Heart of 23-day-old newborn was beating 350 times in a minute, life was saved by giving electric shock.
स्वस्थ होने के बाद माता-पिता ने दुलारा बच्चे को दिया डॉक्टरों को धन्यवाद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शहर में 23 दिन के नवजात शिशु को बिजली के झटके दिए गए। इसी से उसकी जान बच सकी। वजह यह थी कि नवजात का दिल एक मिनट में लगभग 350 बार धड़क रहा था। दवाइयों से भी धड़कन नियंत्रित नहीं हो रही थी। बिजली के झटके देने के बाद बच्चा सामान्य हुआ।
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जानकारी के मुताबिक सनावद निवासी दंपति के 23 दिन के नवजात का वजन तीन किलो था। बच्चा लगातार रो रहा था और दूध नहीं पीता था। माता-पिता उसे इंदौर लेकर आए। यहां बच्चे का ईको और ईसीजी किया तो पता चला कि उसका दिल एक मिनट में 350 से भी ज्यादा बार धड़क रहा था। सामान्यत: नवजातों के दिल की धड़कन 120 के आसपास रहती है। अत्यधिक धड़कन की वजह से हृदयाघात का खतरा बना हुआ था। धड़कन सामान्य ये तीन गुना होने की वजह से लिवर और फेफड़ों में भी सूजन बनी हुई थी। जांच में यह भी पता चला कि बच्चा एक ऐसी बीमारी से ग्रसित है जिसमें दिल में बिजली शॉर्ट सर्किट की तरह से शॉर्ट सर्किट हो जाता है। इसके चलते धड़कन कई गुना बढ़ जाती है। 25 हजार बच्चों में एक-दो को यह परेशानी होती है। दवाइयों से भी जब धड़कन नियंत्रित नहीं हुई तो उसे बिजली के झटके दिए गए। बिजली के झटके देने के बाद बच्चे की धड़कन नियंत्रित हो गई। अभी वह सामान्य है और कुछ महीनों तक नियमित रूप से उसे दवाइयां देनी होंगी।
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एक  सप्ताह से लगातार रो रहा था बच्चा
नवजात की मां पूजा पटेल के अनुसार बच्चा एक सप्ताह से लगातार रो रहा था और सो भी नहीं पा रहा था। 22 जनवरी को उसे जंजीरवाला चौराहा स्थित लोटस हेल्थ केयर में एडमिट किया गया। बच्चे का ईको और ईसीजी करने पर पता चला कि हार्ट बीट 350 चल रही थी।  इतने दिनों से लगातार धड़कन का दो से ढाई गुना ज्यादा होने की वजह से लीवर और फेफड़ों में सूजन बनी हुई थी जिसकी वजह से बच्चे को तकलीफ हो रही थी। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे में यह स्थिति बच्चे के जन्म के पहले और बाद में भी हो सकती है। इस बच्चे को भर्ती करने के बाद ऑक्सीजन के अलावा दूसरी स्टैंडर्ड दवाइयां दी गईं लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी और हार्ट फेल की स्थिति बनी हुई थी। इसे देखते हुए डीसी-कार्डियोवर्जन देने का सोचा। बच्चे की उम्र और वजन के हिसाब से यह जोखिम भरा हो सकता था लेकिन माता-पिता की सहमति के बाद यह किया गया और कुछ देर बाद बच्चे की धड़कन सामान्य हो गई। डॉ. जफर खान के अनुसार उन्होंने अपने 25 साल के अनुभव में पहली बार इतने छोटे बच्चे को डीसी शॉक दिया। इतने छोटे नवजात शिशु में डीसी शॉक थैरेपी का इंदौर में संभवतः यह पहला मामला है। 
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