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इंदौर: शादी में सात नहीं लिए आठ फेरे, आठवां फेरा शहर को छठवीं बार सफाई में नंबर वन बनाने, दहेज मुक्त विवाह का...
Mon, 14 Feb 2022 05:22 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Mon, 14 Feb 2022 05:22 PM IST
सार
आमतौर पर शादी में सात फेरे लिए जाते हैं लेकिन इंदौर में हुई शादी में आठ फेरे लिए गए। यह आठवां फेरा शहर को छठवीं बार नंबर वन बनाने, दहेज मुक्त विवाह आदि के लिए था। अग्रवाल समाज ने यह नवाचार किया है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
ये इंदौर है। देश का सबसे स्वच्छ शहर। एक या दो नहीं लगातार पांच बार। सिर्फ सरकारी महकमे के कारण नहीं बल्कि यहां के बाशिंदों की सहभागिता के कारण भी। ये इंदौर ही है जहां शादी में सात नहीं आठ फेरे भी लिए जा रहे हैं। किसी फैशन के कारण नहीं बल्कि आठवां फेरा इसलिए ताकि शहर स्वच्छ रहे और छठी बार भी स्वच्छता का खिताब हासिल करे।
दरअसल, सबने यही सुना है कि शादी सात फेरों का बंधन है। अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू सात फेरे लेते हैं और गृहस्थ आश्रम की शुरुआत करते हैं। शास्त्रोक्त प्रमाण भी सात फेरे के हैं लेकिन इंदौर में एक समाज ने आठ फेरों के साथ नई परंपरा शुरू की है। अग्रवाल समाज के विवाह सम्मेलन में यह नवाचार किया गया। बायपास स्थित श्री अग्रसेन महासभा केमांगिलक भवन परिसर में तीन युगल परिणय बंधन में बंधे। यहां युगलों ने शास्त्रोक्त सात फेरों के बाद आठवां फेरा भी लिया। इस आठवें फेरे में शहर और समाज के सामाजिक सरोकारों के पालन का संकल्प लिया। इतना ही नहीं गृहस्थी के सामान व उपहारों के साथ ही कर्म प्रधान जीवन का उपदेश देती गीता भेंट की गई। समाजजनों के अनुसार पाणिग्रहण संस्कार में सात फेरों के बाद आठवां फेरा लिया गया। इसका मकसद शहर और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना है। शहर को छठवीं बार देश में सफाई के मामले में नंबर वन बनाने, दहेज मुक्त विवाह करने, जूठन नहीं छोड़ने, कोरोना को हराने एवं गीता के कर्म के सिद्धांतों का पालन करने के लिए आठवां फेरा लिया।
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दरअसल, सबने यही सुना है कि शादी सात फेरों का बंधन है। अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू सात फेरे लेते हैं और गृहस्थ आश्रम की शुरुआत करते हैं। शास्त्रोक्त प्रमाण भी सात फेरे के हैं लेकिन इंदौर में एक समाज ने आठ फेरों के साथ नई परंपरा शुरू की है। अग्रवाल समाज के विवाह सम्मेलन में यह नवाचार किया गया। बायपास स्थित श्री अग्रसेन महासभा केमांगिलक भवन परिसर में तीन युगल परिणय बंधन में बंधे। यहां युगलों ने शास्त्रोक्त सात फेरों के बाद आठवां फेरा भी लिया। इस आठवें फेरे में शहर और समाज के सामाजिक सरोकारों के पालन का संकल्प लिया। इतना ही नहीं गृहस्थी के सामान व उपहारों के साथ ही कर्म प्रधान जीवन का उपदेश देती गीता भेंट की गई। समाजजनों के अनुसार पाणिग्रहण संस्कार में सात फेरों के बाद आठवां फेरा लिया गया। इसका मकसद शहर और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना है। शहर को छठवीं बार देश में सफाई के मामले में नंबर वन बनाने, दहेज मुक्त विवाह करने, जूठन नहीं छोड़ने, कोरोना को हराने एवं गीता के कर्म के सिद्धांतों का पालन करने के लिए आठवां फेरा लिया।
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